logo_banner
Breaking
  • ⁕ महाराष्ट्र में मौसम का डबल अटैक: विदर्भ-मराठवाड़ा में 44°C के पार पहुंचा पारा, अब बेमौसम बारिश और आंधी का अलर्ट ⁕
  • ⁕ प्रफुल्ल पटेल का विरोधियों को दोटूक- "अभी 2026 चल रहा है, 2029 का रण अभी दूर", पवार परिवार का भी माना आभार ⁕
  • ⁕ 17 लाख सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार के लिखित आश्वासन के बाद काम पर लौटेंगे शिक्षक और कर्मी ⁕
  • ⁕ Buldhana: 'गाली' कांड पर झुके शिवसेना विधायक संजय गायकवाड, जताया खेद; पर शिवाजी महाराज के 'सम्मान' पर अब भी अडिग ⁕
  • ⁕ 'हाई प्रोफाइल LSD' नशे की चपेट में संतरा नगरी; पढ़ाई छोड़ ड्रग्स बेच रहे थे छात्र, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Gondia: डी-लिमिटेशन पर कांग्रेस आक्रामक “नारी शक्ति विधेयक का विरोध नहीं, BJP फैला रही फेक नैरेटिव” ⁕
  • ⁕ धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, कहा-'4 बच्चे पैदा करें, एक RSS को दें'; कॉर्पोरेट जिहाद को लेकर गोविंददेव गिरी ने दी तीखी चेतावनी ⁕
  • ⁕ Ramtek: नवरगांव स्थित टूरिस्ट ढ़ाबा के कुक की छह माह बाद मिली लाश, पुलिस ने ढ़ाबे के 4 कर्मचारियों को किया गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Wardha: आपूर्ति विभाग की बड़ी कार्रवाई, हजारों टन अवैध गेहूं-चावल जब्त, बजरंग दल की सतर्कता से गोदाम सील ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
National

ओडिशा: सिस्टम की बेरुखी ने भाई को बनाया 'बेबस', बहन का कंकाल कंधे पर लादकर बैंक पहुँचा शख्स!


केओंझर (ओडिशा): ओडिशा के केओंझर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवता और बैंकिंग सिस्टम, दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक आदिवासी युवक, जीतू मुंडा, अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल कंधे पर लादकर बैंक की शाखा में पहुँच गया। यह नज़ारा देखकर बैंक में हड़कंप मच गया और लोग दंग रह गए।

क्या है पूरा मामला?
डियानाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा की बड़ी बहन, कलारा मुंडा की मृत्यु 26 जनवरी 2026 को हो गई थी। कलारा के बैंक खाते में 20,000 रुपये जमा थे। जीतू आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और यह राशि उसके गुजारे के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी।

जीतू ने कई बार 'ओडिशा ग्रामीण बैंक' की मल्लिपसी शाखा के चक्कर लगाए और बैंक कर्मियों को बहन की मौत की जानकारी दी। लेकिन बैंक कर्मचारियों ने नियमों का हवाला देते हुए साफ कह दिया कि "खाताधारक (बहन) को साथ लाओ, तभी पैसे मिलेंगे।"

बेबसी में कब्र से निकाला शव
अनपढ़ और कानूनी प्रक्रियाओं से अनजान जीतू को जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उसने अपनी मृत बहन की कब्र खोदी और उसका कंकाल बाहर निकाल लिया। वह करीब 3 किलोमीटर तक उस कंकाल को कंधे पर रखकर पैदल चला और सीधे बैंक के बरामदे में लाकर रख दिया। जीतू का कहना था कि जब बैंक ने खाताधारक को लाने को कहा, तो वह उसे ले आया।

कानूनी पेच में उलझा 'वारिस'
पुलिस के अनुसार, कलारा मुंडा के खाते में नॉमिनी (Nominee) के तौर पर दर्ज उसके पति और बेटे की भी पहले ही मौत हो चुकी है। ऐसे में जीतू ही अपनी बहन की संपत्ति का इकलौता दावेदार है। लेकिन निरक्षर होने के कारण उसे 'कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र' (Legal Heir Certificate) जैसी प्रक्रियाओं की कोई समझ नहीं थी।

पुलिस और प्रशासन की दखल
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पटना थाना प्रभारी (IIC) किरण प्रसाद साहू ने बताया, "जीतू मुंडा आदिवासी समुदाय से है और पूरी तरह अनपढ़ है। उसे उत्तराधिकारी या नॉमिनी जैसे शब्दों का अर्थ नहीं पता। दुर्भाग्य से बैंक अधिकारी भी उसे सही प्रक्रिया समझाने में विफल रहे, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया।"

अब क्या होगा?
पुलिस ने मानवीय आधार पर दखल देते हुए जीतू को आश्वासन दिया है कि वे कानूनी प्रक्रिया पूरी करवाकर उसकी बहन के खाते के पैसे उसे दिलाएंगे। प्रशासन के समझाने के बाद, पुलिस की मौजूदगी में बहन के कंकाल को दोबारा कब्रिस्तान में पूरे सम्मान के साथ दफन कर दिया गया है।


यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल इंडिया के दौर में भी समाज का एक तबका आज भी इतना पीछे है कि उसे बुनियादी कानूनी अधिकारों की जानकारी नहीं है। साथ ही, बैंक कर्मियों की संवेदनहीनता ने एक गरीब भाई को अपनी बहन की लाश के साथ दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया।