Middle East War: मिडिल ईस्ट युद्ध का 32वां दिन: कच्चे तेल में आग, ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर के पार
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी जंग (Middle East War) अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। 32 दिनों से जारी संघर्ष के बीच वैश्विक बाजार (World Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं (Economy) पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
28 फरवरी को संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) और इज़राइल (Israel) द्वारा ईरान (Iran) पर हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष लगातार जारी है। दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे कई अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। युद्धविराम की कोशिशें भी अब तक नाकाम साबित हुई हैं।
इस बीच 31 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड 116.50 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो जून 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी टेंशन:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में ईरान को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने खार्ग द्वीप पर कब्जे की संभावना जताई, जहां से ईरान का लगभग 90% तेल निर्यात होता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखा, तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा।
बाजार पर असर और बढ़ती आशंका:
विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च महीने में ही कच्चे तेल की कीमतों में 50-60% तक का उछाल आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है, उसके बंद होने से सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक संकट गहरा सकता है।
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