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PM मोदी ने सैंट्रल एवेन्यू और नेता सुभाष चन्द्र बोस की मूर्ति का भी किया अनावरण, कहा- कार्तव्यपथ के रूप में एक नए युग की शुरुआत


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल एवेन्यू के पहले फेज और कर्तव्यपथ पर नेता सुभासचन्द्र बोस की 28 फूट की मूर्ति को देश की जनता को समर्पित कर दिया है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित करते हुए कहा कि, "उपनिवेशवाद का प्रतीक 'किंग्सवे' एक इतिहास होगा और हमेशा के लिए मिटा दिया गया है। कार्तव्यपथ के रूप में एक नए युग की शुरुआत हुई है। उपनिवेशवाद के एक और प्रतीक से बाहर आने पर मैं देश के सभी लोगों को बधाई देता हूं।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले 8 सालों में हमने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिन पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की छाप थी। वह 'अखंड भारत' के पहले प्रमुख थे जिन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।" उन्होंने आगे कहा, "आज इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। ब्रिटिश शासन के दौरान, यहां अंग्रेजों के एक प्रतिनिधि की एक मूर्ति खड़ी थी। नेताजी की प्रतिमा की स्थापना के साथ, हमने एक सशक्त भारत के लिए एक नया मार्ग स्थापित किया है।"

उन्होंने आगे कहा, "उस वक्त उन्होंने कल्पना की थी कि लाल किले पर तिरंगा फहराने की क्या अनुभूति होगी। इस अनुभूति का साक्षात्कार मैंने स्वयं किया, जब मुझे आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला।"

ये न शुरुआत है, न अंत

प्रधानमत्री ने कहा, "आज अगर राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्यपथ बना है, आज अगर जॉर्ज पंचम की मूर्ति के निशान को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है, तो ये गुलामी की मानसिकता के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है।" उन्होंने कहा, "ये न शुरुआत है, न अंत है। ये मन और मानस की आजादी का लक्ष्य हासिल करने तक निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा है।"

अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों क़ानूनों को बदले

पीएम मोदी ने आगे कहा, "आज देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों क़ानूनों को बदल चुका है। भारतीय बजट जो इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसका समय और तारीख भी बदली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आज़ाद किया जा रहा है।"

कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है। ये भारत के लोकतान्त्रिक अतीत और सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है।यहां जब देश के लोग आएंगे, तो नेताजी की प्रतिमा, नेशनल वार मेमोरियल, ये सब उन्हें कितनी बड़ी प्रेरणा देंगे, उन्हें कर्तव्यबोध से ओत-प्रोत करेंगे।"

केवल आर्किटैक्चर नहीं आत्मा भी बदली

प्रधानमंत्री ने कहा, "राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। राजपथ की भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, उसकी संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी। आज इसका आर्किटैक्चर भी बदला है, और इसकी आत्मा भी बदली है।" उन्होंने कहा, "आज के इस अवसर पर मैं अपने उन श्रमिक साथियों का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने कर्तव्यपथ को केवल बनाया ही नहीं है, बल्कि अपने श्रम की पराकाष्ठा से देश को कर्तव्य पथ दिखाया भी है।"