Nagpur: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को बनेगी विशेष समिति, ग्रासलैंड और जलस्रोत विकास से बाघों को जंगल में ही रोकने की तैयारी
नागपुर: नागपुर जिले में बाघों के बढ़ते हमलों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए बाघों की गतिविधियों पर नियंत्रण और ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चरागाह विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया जाएगा। इस दिशा में एक विशेष समिति का गठन कर आगामी तीन वर्षों का कार्ययोजना-आधारित प्रारूप तैयार किया जाएगा।
जिले में बाघों और अन्य वन्यजीवों के मानवीय बस्तियों की ओर बढ़ते मूवमेंट को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। नियोजन समिति की बैठक में इस गंभीर विषय पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें बाघों के हमलों को रोकने और किसानों व नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों पर सहमति बनी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि वन क्षेत्रों में पर्याप्त चरागाह विकसित किए जाएंगे, ताकि बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव भोजन की तलाश में गांवों की ओर न आएं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो अगले तीन वर्षों का विस्तृत विकास प्रारूप तैयार करेगी।
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जानकारी दी कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सशक्त करने के लिए ग्रासलैंड विकास, जलस्रोतों की उपलब्धता और वन प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाएगी। इस समिति में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, वन विभाग और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि चरागाह विकास की योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आए और ग्रामीण क्षेत्रों में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार की ओर से इस योजना के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया है।
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