नागपुर की जलापूर्ति के लिए 1300 करोड़ की योजना, कन्हान-कोलार नदी पर बनेगा 900 करोड़ का बैराज; पालकमंत्री बावनकुले ने अधिकारियों को दिए निर्देश
नागपुर: नागपुर में जल किल्लत और भविष्य में बढ़ने वाली पानी की मांग को देखते हुए प्रशासन ने अभी से योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां मौजूदा समय में जल संकट से निपटने के लिए पानी बचाने और वैकल्पिक जलस्रोतों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य में शहर और आसपास के क्षेत्रों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए स्थायी जलापूर्ति की योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इसी कड़ी में नागपुर के लिए करीब 1300 करोड़ रुपये की दो बड़ी योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इनमें 900 करोड़ रुपये की लागत से कन्हान-कोलार बैराज का निर्माण और 400 करोड़ रुपये से पेंच बांध के अतिरिक्त पानी का उपयोग करने की योजना शामिल है। पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने संबंधित विभागों को इनके प्रस्ताव तत्काल राज्य सरकार को भेजने के निर्देश दिए हैं।
नागपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने दो स्तरों पर तैयारी शुरू की है। एक ओर मौजूदा जल संकट को देखते हुए पानी की बर्बादी रोकने, जल संरक्षण और वैकल्पिक जलस्रोतों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर भविष्य की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थायी जलापूर्ति की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इसी सिलसिले में शनिवार को पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नियोजन भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में नागपुर और आसपास के शहरों के लिए करीब 1300 करोड़ रुपये की दो बड़ी जलापूर्ति योजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
कन्हान-कोलार नदी पर 900 करोड़ रुपये से बनेगा बैराज
पहली योजना के तहत कन्हान-कोलार नदी पर 900 करोड़ रुपये की लागत से बैराज बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। पालकमंत्री ने महानगरपालिका और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से इसका प्रस्ताव तैयार कर तत्काल राज्य सरकार को भेजने के निर्देश दिए। इस परियोजना का उद्देश्य नागपुर के लिए पानी का स्थायी स्रोत विकसित करना है।
वहीं, दूसरी योजना के तहत नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी NMRDA के माध्यम से 400 करोड़ रुपये खर्च कर नागपुर के आसपास के शहरों में जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए पेंच बांध में नागपुर महानगरपालिका के हिस्से का बचा हुआ 35 एमएमक्यूब पानी उपयोग में लाने की योजना है। बावनकुले ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
वर्तमान जल संकट से निपटने के लिए भी कई उपायों पर काम किया जा रहा है। बैठक में महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विपिन ने जल संरक्षण अभियान 2026 की जानकारी देते हुए बताया कि शहर में पाइपलाइन लीकेज की पहचान कर पानी की बर्बादी रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
400 कुओं पर सौर ऊर्जा आधारित दोहरी जल पंपिंग
शहर में मौजूद 860 सार्वजनिक कुओं के पानी का अधिकतम उपयोग करने की योजना भी बनाई गई है। इसके तहत 400 कुओं पर सौर ऊर्जा आधारित दोहरी जल पंपिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस परियोजना पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे प्रतिदिन 20 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा शहर के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में हाइड्रेंट लगाए जाएंगे। यहां से उपचारित पानी टैंकरों के माध्यम से उद्यानों और सड़कों के किनारे लगे पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
व्यावसायिक गतिविधियों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर भी रोक
व्यावसायिक गतिविधियों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। महानगरपालिका ने 293 वॉशिंग सेंटरों का सर्वे किया है। इनमें से 75 सेंटरों को नल के पानी का इस्तेमाल करने पर नोटिस जारी किए गए हैं। पालकमंत्री ने व्यावसायिक उपयोग के लिए पानी की खपत पर सीमा तय करने और वैकल्पिक जलस्रोतों के इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बावनकुले ने कम बारिश के कारण बनी सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए नागरिकों से पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लागू करने पर भी जोर दिया। यानी नागपुर में एक तरफ मौजूदा जल संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण और पानी की बचत के उपाय किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ 1300 करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजनाओं के जरिए भविष्य की जलापूर्ति को सुरक्षित करने की तैयारी है।
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