Akola: महानगरपालिका में सत्ता स्थापना के लिए गठबंधन और पर्दे के पीछे हलचल तेज, 22 जनवरी को होगा आरक्षण घोषित
अकोला: अकोला महानगरपालिका में सत्ता संघर्ष की पृष्ठभूमि पर अब सभी का ध्यान महापौर पद के आरक्षण पर केंद्रित हो गया है। गुरुवार, 22 जनवरी को महापौर पद का आरक्षण घोषित होने वाला है जिससे शहर की राजनीति में भारी हलचल मची हुई है। नतीजों के बाद उत्पन्न अनिश्चितता, सत्ता स्थापना के लिए चल रही रस्साकशी और निर्दलीय नगरसेवकों की निर्णायक भूमिका को आरक्षण के फैसले से नई दिशा मिलेगी। यह घोषणा सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।
महापालिका में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने से सत्ता बनाने के लिए गठबंधन और गुप्त बैठकों को रफ्तार मिल गई है। भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट), शिवसेना (उद्धव गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट), कांग्रेस और निर्दलीय नगरसेवकों के बीच जोरदार संपर्क अभियान चल रहा है। लेकिन महापौर पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, इसी पर आगे का राजनीतिक समीकरण तय होगा, इसलिए सभी दल अभी 'वेट एंड वॉच' की भूमिका में हैं।
अगर महापौर पद महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ, तो कई दावेदारों के सपनों पर पानी फिर सकता है, वहीं कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है। इससे संभावित उम्मीदवारों में बेचैनी बढ़ गई है और पार्टी नेतृत्व वैकल्पिक रणनीतियां तैयार कर रहा है। कुछ दलों ने संभावित आरक्षण मानकर 'प्लान बी' और 'प्लान सी' तक तैयार रखे हैं।
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