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Amravati

Amravati: कम बारिश के अनुमान से बढ़ी चिंता; बांधों में केवल 40% जल साठा शेष; जलापूर्ति बनाए रखने की बड़ी चुनौती


अमरावती: मानसून का समय नजदीक आ चुका है और जल्द ही जिले में मानसूनी हवाओं का आगमन होने वाला है। लेकिन इस साल मौसम विभाग द्वारा कम और रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान जताए जाने के बाद, अमरावती जिले में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। वर्तमान स्थिति में जिले के सभी सिंचाई परियोजनाओं में कुल मिलाकर केवल 40 प्रतिशत जल भंडारण ही बचा है। मौसम विभाग की इस चेतावनी को देखते हुए आने वाले समय में पानी को बचाए रखना और उसकी सुचारू आपूर्ति करना जल संसाधन विभाग के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।

मृग नक्षत्र की शुरुआत, लेकिन खंडित बारिश का साया
जून महीने में आज (7 जून) से मृग नक्षत्र की शुरुआत हो रही है, जिसे खेती और बुआई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार पूरे सीजन के दौरान बारिश लगातार न होकर बीच-बीच में बड़े अंतराल (खंडित रूप) पर होगी, जिससे कुल वर्षा का औसत भी कम रह सकता है। आमतौर पर अगस्त और सितंबर महीने की बारिश से बांधों का जलस्तर बढ़ता है, लेकिन इस बार शुरुआती महीनों में जल संसाधन विभाग को पानी के इस्तेमाल पर विशेष नियंत्रण रखना होगा।

पानी के आरक्षण (कोटा) में हो सकता है बदलाव
अमरावती जिले के बांधों से न केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है, बल्कि विभिन्न सिंचाई योजनाओं और औद्योगिक क्षेत्रों (MIDC) को भी पानी दिया जाता है। इसके लिए हर साल पानी का कोटा आरक्षित किया जाता है। लेकिन इस साल सूखे के खतरे और कम बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन को इस जलापूर्ति आरक्षण नीति में बदलाव करना पड़ सकता है, ताकि पीने के पानी की किल्लत न हो।

अपर वर्धा बांध पर सबसे ज्यादा दबाव
जिले के सबसे बड़े 'अपर वर्धा बांध' में इस समय 338 मिलियन क्यूबिक मीटर (दलघमी) जल साठा बचा हुआ है। अमरावती शहर समेत जिले की अधिकांश तहसीलें और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं पूरी तरह इसी बांध पर निर्भर हैं। साथ ही जिले का सबसे बड़ा कृषि सिंचित क्षेत्र भी इसी के पानी से फलता-फूलता है। यदि मानसून के दौरान बारिश समय पर और पर्याप्त नहीं हुई, तो खरीफ सीजन की फसलों को बचाने के लिए सिंचाई के पानी की भारी किल्लत हो सकती है। यही चिंताजनक स्थिति जिले के 7 मध्यम और 48 लघु बांधों की भी है, जहां पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।