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Yavatmal

यवतमाल में कांग्रेस को बड़ा झटका, साहेबराव कांबले शिवसेना में हुए शामिल; उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिलाई पार्टी की सदस्य्ता


मुंबई/यवतमाल: महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में जारी शह और मात के खेल के बीच यवतमाल विधान परिषद चुनाव (Yavatmal Legislative Council Election) से शुरू हुआ राजनीतिक ड्रामा अब अपने अगले पड़ाव पर पहुंच गया है। महाविकास अघाड़ी (Mahavikas Aghadi) के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर ऐन वक्त पर अपना नामांकन वापस लेकर सबको चौंकाने वाले साहेबराव कांबले (Sahebrao Kamble) ने आखिरकार आज औपचारिक रूप से शिवसेना का दामन थाम लिया है।

मुंबई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और यवतमाल के प्रभावशाली नेता व मंत्री संजय राठौड़ (Sanjay Rathod) की उपस्थिति में यह बड़ा दल-बदल कार्यक्रम संपन्न हुआ। कांबले के साथ यवतमाल जिला कांग्रेस (Congress) के सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी शिवसेना की सदस्यता ली, जिसे स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

नामांकन वापसी से शुरू हुआ था सियासी भूचाल

बता दें कि, यवतमाल विधान परिषद सीट पर महाविकास अघाड़ी की ओर से साहेबराव कांबले को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया गया था। लेकिन ऐन वक्त पर कांबले ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे महाविकास अघाड़ी बिना चुनाव लड़े ही रेस से बाहर हो गई। इस भारी फजीहत के बाद कांग्रेस तुरंत हरकत में आई और जिला कांग्रेस कमेटी की सिफारिश पर प्रदेश कांग्रेस ने साहेबराव कांबले को प्रदेश महासचिव पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। इस पूरी उठापटक के बाद वरिष्ठ नेता माणिकराव ठाकरे के निवास स्थान पर भी बैठकों का दौर चला था।

संख्या बल की कमी के कारण पीछे हटा- कांबले

शिवसेना में शामिल होने के बाद साहेबराव कांबले ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने यह फैसला जमीनी हकीकत को देखकर लिया था। चुनाव में जीत के लिए आवश्यक विधायकों या मतों की संख्या महाविकास अघाड़ी के पास नहीं थी। हार निश्चित होने के कारण चुनाव लड़ने से बेहतर उन्होंने पीछे हटना और लोगों के काम करना सही समझा।

"महायुति की जीत तय"- एकनाथ शिंदे 

साहेबराव कांबले और उनके समर्थकों का पार्टी में स्वागत करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा, "साहेबराव कांबले ने हमारे प्रभारी मंत्री संजय राठौड़ को पहले ही बता दिया था कि वोटों के आंकड़ों में भारी अंतर है। उन्हें अच्छी तरह पता था कि इस सीट पर महायुति का ही उम्मीदवार जीतकर आने वाला है। इसलिए सिर्फ चुनाव लड़ने के बजाय उन्होंने लोगों के काम करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने उम्मीदवारी वापस लेकर शिवसेना के साथ काम करने का जो फैसला किया है, वह बहुत सराहनीय है।"

शिंदे ने आगे दावा किया कि इस बार विधान परिषद की सभी 17 की 17 सीटों पर महायुति के उम्मीदवार ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग सिर्फ पीएम मोदी का विरोध करने की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें जनता पूरी तरह नकार चुकी है। 

जिले में कांग्रेस को बड़ा झटका

नामांकन वापस लेने के बाद साहेबराव कांबले को कांग्रेस ने पार्टी से निष्काषित कर दिया था। हालांकि, कांबले के कदम से यवतमाल जिले में कांग्रेस के संगठन को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि उनके साथ जमीन पर काम करने वाले कई सक्रिय नेता अब शिवसेना (शिंदे गुट) का हिस्सा बन चुके हैं। मंत्री संजय राठौड़ की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम से यवतमाल और विदर्भ क्षेत्र में शिंदे गुट को एक नया दलित और श्रमिक चेहरा मिल गया है, जिसका सीधा असर आने वाले स्थानीय और निकाय चुनावों पर दिखना तय है।