भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड का महापौर-आयुक्त ने किया निरीक्षण, कचरा प्रसंस्करण परियोजना जल्द पूरी करने के निर्देश
- नागपुर में रोजाना निकल रहे 1300 मीट्रिक टन कचरे के निपटान के लिए नई व्यवस्था।
- आरडीएफ, बायो-सीएनजी और जैविक खाद बनेगी।
- कंपनियों को तय समयसीमा में मशीनरी लगाने और बायोगैस प्रोजेक्ट का टाइम-बाउंड प्लान देने के निर्देश।
नागपुर: नागपुर महानगरपालिका की महापौर निता ठाकरे और मनपा आयुक्त डॉ. विपीन ने मंगलवार (10 मार्च) को भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड परिसर में लगभग 10 एकड़ भूमि पर विकसित किए जा रहे घनकचरा प्रबंधन परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भूमि ग्रीन एनर्जी एन्व्हायरोकेयर एलएलपी द्वारा स्थापित किए जा रहे नए ठोस कचरा प्रसंस्करण केंद्र तथा सुसबिडी (SusBDe) कंपनी के उस प्रकल्प का भी जायजा लिया, जिसमें कचरे को प्रोसेस कर आरडीएफ, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान महापौर निता ठाकरे ने अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन को निर्देश दिए कि घनकचरा प्रबंधन परियोजना का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही भांडेवाड़ी परिसर में जमा कचरे के ढेर को कम कर अधिक से अधिक भूमि खाली करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने सुसबिडी कंपनी के प्रतिनिधियों को जल्द से जल्द शेष मशीनरी स्थापित करने तथा बायोगैस परियोजना के लिए समयबद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
बताया गया कि नागपुर शहर में प्रतिदिन करीब 1300 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। वर्तमान में सुसबिडी परियोजना के माध्यम से 250 से 300 मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है, जबकि भूमि ग्रीन प्रा. लि. कंपनी द्वारा लगभग 500 मीट्रिक टन कचरे पर प्रक्रिया की जाएगी। नए कचरे पर रोजाना प्रोसेसिंग शुरू होने से भविष्य में कचरे के नए ढेर बनने की संभावना कम होगी, वहीं पुराने कचरे पर भी प्रक्रिया जारी है। इससे भांडेवाड़ी परिसर में जमा कचरे के ढेर धीरे-धीरे कम होने और जगह खाली होने की उम्मीद जताई जा रही है।
निरीक्षण के दौरान महापौर और आयुक्त ने पूरे प्रकल्प का अवलोकन कर प्रत्येक चरण की जानकारी ली और परिसर में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घनकचरा प्रसंस्करण केंद्र का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए।पुणे स्थित भूमि ग्रीन एनर्जी एन्व्हायरोकेयर एलएलपी कंपनी कचरे के प्रसंस्करण से जैविक खाद और आरडीएफ तैयार करेगी। इस परियोजना के लिए कंपनी के साथ पांच वर्षों का करार किया गया है।
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