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Nagpur

MVA उम्मीदवार हार नहीं कर पा रहे स्वीकार, सीसीटीवी सहित अन्य वीडियो फुटेज के लिए हाईकोर्ट में लगाई याचिक


नागपुर: विधानसभा चुनाव हुए छह महीने से ज्यादा का समय होने को आ गया है, लेकिन हारे उम्मीदवार अभी भी उसे स्वीकार नहीं कर पा रहे है। उम्मीदवार कभी चुनाव में धांधली का आरोप लगा रहे तो कभी वोटो की गिनती नियमों के तहत नहीं की गई यह दावा कर रहे है। इसी क्रम में महाविकास आघाड़ी के हारे प्रत्याशियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंड पीठ में याचिका लगाई और सीसीटीवी की मांग की है।

महाविकास आघाड़ी के पराजित उम्मीदवार प्रफुल्ल गुड़धे, गिरीश पांडव, जयश्री शेलके और महेश गणगणे ने बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में रिट याचिका दायर की है। अपनी याचिका में उम्मीदवारों ने सीसीटीवी सहित अन्य वीडियो फुटेज और फॉर्म 17 (सी) की प्रति देने की मांग की है। याचिका पर आज मंगलवार को अदालत में सुनवाई होगी।

ज्ञात हो कि, राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए 20 नवंबर 2024 को मतदान हुआ और 23 नवंबर 2024 को परिणाम घोषित किए गए. दक्षिण-पश्चिम नागपुर निर्वाचन क्षेत्र से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुड़धे, दक्षिण नागपुर से मोहन मते ने पांडव, अकोला जिले की आकोट सीट से प्रकाश भारसाकले ने गणगणे जबकि बुलढाणा से संजय गायकवाड़ ने शेलके को पराजित किया था.

हालांकि याचिकाकर्ता परिणामों से संतुष्ट नहीं थे. उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान कई तरह की धांधलियां की गई. परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने ईवीएम, बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट व वीवीपैट प्रिंटर्स को मतदान के लिए गोदाम से बाहर निकालने से लेकर मतदान के बाद गोदाम में वापस रखने के समय की सीसीटीवी सहित अन्य सभी वीडियो फुटेज और फॉर्म 17 (सी) की प्रति प्राप्त करने के लिए चुनाव अधिकारियों के पास आवेदन किया था. लेकिन उनकी मांग अभी तक पूरी नहीं की गई. आखिर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी. इससे पूर्व उन्होंने विजयी उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव याचिका भी दायर की थी जो प्रलंबित है.

नियमों के उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्वाचन प्रणाली ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों का उल्लंघन किया. अनेक स्थानों में समय पर ईवीएम बदले गए. फर्जी मतदान किए गए. इस कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उनका यह भी कहना है कि मतदाताओं के भरपूर समर्थन को देखते हुए उन्हें अपनी जीत का पूरा विश्वास था. याचिका में भारतीय चुनाव आयोग, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी और जिला चुनाव अधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया है.