पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान पर मांगी माफ़ी, कहा- गुरु शिष्य परंपरा की महिमा का किया वर्णन; संघ को लेकर भी कही बड़ी बात
नागपुर: छत्रापति शिवाजी महाराज के कथित अपमान को लेकर महाराष्ट्र की सियासत गरमाई हुई है। वहीं विवाद को बढ़ते देख पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने इस पर अपना पक्ष रखा। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने कहा कि, "उन्होंने केवल गुरु शिष्य की महान महिला का वहां उल्लेख किया था। उनका मकसद छत्रापति शिवाजी महाराज का अपमान करना नहीं था। इसी के साथ शास्त्री ने अपने बयान पर क्षमा मांगते हुए कहा कि, अगर जाने-अनजाने में मेरे बयान से मन दुख हो तो मैं माफ़ी मांगता हूँ। इसी के साथ कथावाचक ने चार बच्चो को लेकर कही बात पर भी स्पष्टीकरण दिया है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे रोल मॉडल हैं। हिंदू राष्ट्र बनाने का आइडिया हमें उनसे मिला। मैंने यह बताने की कोशिश की थी कि वे अपने गुरु के प्रति कितने समर्पित थे। लेकिन, कुछ हिंदू विरोधी ताकतों ने मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया। फिर भी, अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची है।"
धीरेन्द्र शास्त्री ने असल में क्या कहा?
इस मौके पर उन्होंने कहा कि हर सनातनी छत्रपति शिवाजी महाराज को संत मानता है। दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो उनके बारे में बुरा बोले। मैं खुद उनके बारे में बुरा बोलने के बारे में सोच भी नहीं सकता। हम उनके नक्शेकदम पर चलकर हिंदू राष्ट्र बना रहे हैं। उन्होंने इस देश के लिए जो काम किया है, वह बहुत बड़ा है। हालांकि, मेरी बातों का गलत मतलब निकालने और दूसरों को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए मेरे बयानों को हमेशा गलत दिखाया जाता है, ऐसा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मैंने किसी का अपमान नहीं किया है, लेकिन कुछ ताकतें धर्म परिवर्तन के रथ को रोकने की कोशिश कर रही हैं।
अंधविश्वास नहीं फैलाता
उन्होंने कहा, "मैं कभी अंधविश्वास नहीं फैलाता। मैं किसी को मेरी पूजा करने के लिए नहीं कहता। लोग आस्था के साथ मेरे दरबार में आते हैं। मैं सिर्फ उन्हें हनुमान का भक्त बनाने की कोशिश करता हूं।" धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में लव जिहाद के कई मामले बढ़ रहे हैं और इसके खिलाफ सख्त कानून लाए जाने चाहिए।
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