शिवाजी महाराज विवाद पर महाराष्ट्र की सियासत गर्म; वडेट्टीवार ने शास्त्री को बताया “ढोंगी बाबा”, पूछा- क्या महापुरुषों का अपमान करने वालों को बचाने के लिए सत्ता में बैठे हैं?
नागपुर: छत्रपति शिवाजी महाराज के कथित अपमान को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “ढोंगी बाबा” करार दिया है, वहीं महायुति सरकार पर भी चुप्पी साधने का आरोप लगाया है। वडेट्टीवार ने एसटी कर्मचारियों और सरकारी ढांचे के विलीनीकरण से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए। साथ ही ऑटो चालकों पर मराठी भाषा को लेकर सख्ती के सवाल पर उन्होंने कहा कि मराठी अनिवार्य है, लेकिन अन्य भाषाओं में संवाद पर पाबंदी उचित नहीं है।
कांग्रेस विधिमंडल दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र की महायुती सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए सवाल उठाया है कि क्या यह सरकार केवल महापुरुषों का अपमान करने वालों को संरक्षण देने के लिए सत्ता में बैठी है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि महाराज किसी के आगे झुके होते तो स्वराज्य का निर्माण कभी न होता, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज सत्ता में बैठे लोग 'भोंदू' बाबाओं के चरणों में नतमस्तक हो रहे हैं।
वडेट्टीवार ने धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को महाराष्ट्र के इतिहास की रत्ती भर जानकारी नहीं है, उसकी महाराज पर टिप्पणी करने की हिम्मत कैसे हुई? उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी सवाल दागा कि जब यह अपमान हो रहा था, तब उन्होंने उसे रोका क्यों नहीं। साथ ही, उन्होंने संजय गायकवाड़ जैसे नेताओं पर तंज कसते हुए पूछा कि अब ये स्वघोषित शिवप्रेमी किस बिल में जाकर छिप गए हैं और अब उनकी आवाज क्यों नहीं निकल रही है।
इसके अलावा, वडेट्टीवार ने एसटी कर्मचारियों के मुद्दे पर भी सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि जो काम महायुती सरकार को असंभव लग रहा था, उसे तेलंगाना सरकार ने कर दिखाया है। तेलंगाना में एसटी का विलीनीकरण कर कर्मचारियों की 31 मांगों को स्वीकार किया गया है, जिसमें वेतन वृद्धि और नियमितीकरण जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि जब महाविकास अघाड़ी की सरकार थी, तब भाजपा ने गोपीचंद पड़लकर और सदावर्ते जैसे लोगों को आगे कर हड़ताल करवाई थी, लेकिन अब सत्ता मिलते ही वे अपने वादों से मुकर गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर तेलंगाना सरकार कर्मचारियों के हित में कदम उठा सकती है, तो महाराष्ट्र की महायुती सरकार अब 'मूकदर्शक' बनकर क्यों बैठी है? सत्ता की चमक में भाजपा अब एसटी कामगारों के संघर्ष को पूरी तरह भूल चुकी है।
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