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Buldhana

शिवाजी कौन था?’ किताब पर बवाल: शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ पर प्रकाशक को जान से मारने की धमकी देने का आरोप


बुलढाणा: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ पर ‘शिवाजी कौन था?’ पुस्तक के शीर्षक को लेकर प्रकाशक को फोन पर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है। इस पूरे मामले की ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, प्रसिद्ध विचारक और कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे द्वारा करीब 37 साल पहले लिखी गई पुस्तक ‘शिवाजी कौन था?’ के शीर्षक को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इस किताब के प्रकाशक प्रशांत आंबी को संजय गायकवाड़ ने फोन कर कड़ी आपत्ति जताई। गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि किताब के शीर्षक और उसमें इस्तेमाल भाषा से छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया गया है। इसी बात को लेकर उन्होंने फोन पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

“घर में घुसकर मार दूंगा” – ऑडियो में धमकी

वायरल ऑडियो क्लिप में संजय गायकवाड़ कथित तौर पर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने प्रकाशक को गाली-गलौज करते हुए कहा कि “घर में घुसकर मारूंगा, चिरड़ दूंगा, जीभ काट दूंगा…” इन धमकियों के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

प्रकाशक का जवाब: “पहले किताब पढ़िए”

प्रकाशक प्रशांत आंबी ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि यह पुस्तक उन्होंने नहीं लिखी, बल्कि गोविंद पानसरे की रचना है, जो 1988 में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने कहा कि किताब में कहीं भी शिवाजी महाराज का अपमान नहीं किया गया है और गायकवाड़ को पहले पूरी किताब पढ़नी चाहिए थी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज

इस विवाद ने अब अभिव्यक्ति की आज़ादी के मुद्दे को भी केंद्र में ला दिया है। बताया जा रहा है कि धमकियों के बावजूद प्रकाशक ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और जवाब में कहा, "“आप आइए, मेरी जीभ काट लीजिए।” इस बयान के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

गायकवाड़ का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बाद संजय गायकवाड़ ने एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। हालांकि, उन्होंने अपने रुख में ज्यादा बदलाव नहीं किया और अपनी आपत्ति को सही ठहराया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर इतिहास, आस्था और राजनीति के टकराव को सामने ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।