"यह महिला आरक्षण नहीं, डी-लिमिटेशन बिल था", सांसद प्रशांत पडोले ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की
भंडारा: महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले ने इसे महिला आरक्षण नहीं बल्कि डी-लिमिटेशन से जुड़ा मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले ने भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि यह महिला आरक्षण बिल है या डी-लिमिटेशन बिल। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका है, इसके बावजूद इसे अब तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से उन राज्यों के साथ अन्याय हो रहा है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण किया है, और यह उत्तर व दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच विवाद पैदा कर सकता है।
सांसद ने यह भी कहा कि 350 सीटें बढ़ाने से आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार के पास संसाधन हैं, तो सांसदों के स्थानीय क्षेत्र विकास निधि को बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये किया जाए, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार सच में महिलाओं को न्याय देना चाहती है, तो प्रधानमंत्री को इस्तीफा देकर किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाना चाहिए।
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