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Amravati

सुनेत्रा पवार का अमरावती में शिवसेना पैटर्न, रवि राणा को कैबिनेट तो नवनीत राणा को राज्यसभा का ऑफर; बस YSP का करना पड़ेगा विलय!


अमरावती: महाराष्ट्र के साथ-साथ अमरावती की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की ओर से पूर्व सांसद व भाजपा नेता नवनीत राणा और उनके पति विधायक रवि राणा को एक बहुत बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव (ऑफर) दिया गया है।

इस बड़े सियासी दांव के तहत नवनीत राणा को राज्यसभा भेजने और विधायक रवि राणा को राज्य मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद देने की पेशकश की गई है। हालांकि, इस भारी-भरकम प्रस्ताव के साथ अजित पवार गुट ने एक बेहद कड़ी शर्त भी रखी है।

क्या है अजित पवार गुट की बड़ी शर्त?
सूत्रों का दावा है कि इस राजनीतिक सौदे के लिए शर्त यह रखी गई है कि विधायक रवि राणा को अपनी पार्टी 'युवा स्वाभिमान पार्टी' (YSP) का पूरी तरह से राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) में विलय करना होगा। इस रणनीति को महाराष्ट्र की राजनीति में 'बच्चू कडू-एकनाथ शिंदे' पैटर्न के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत छोटे दलों या गुटों को बड़े दल के साथ जोड़कर सत्ता में हिस्सेदारी दी जाती है।

सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर नजर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के कारण खाली हुई राज्यसभा की सीट के लिए ही नवनीत राणा के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। लेकिन इसके लिए पहली शर्त यही है कि नवनीत राणा को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल होना पड़ेगा। इसके साथ ही, आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में विधायक रवि राणा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर अमरावती में महायुति को और मजबूत करने की तैयारी है।

राणा दंपती के कार्यालय में दस्तावेज तैयार होना शुरू
इस चर्चा को तब और हवा मिल गई जब सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि अमरावती में राणा दंपती के आधिकारिक कार्यालय में राज्यसभा उम्मीदवारी के लिए आवश्यक दस्तावेज और हलफनामे (प्रतिज्ञापत्र) तैयार करने की प्रक्रिया बहुत तेजी से शुरू कर दी गई है। इस प्रशासनिक तैयारी से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम आकार ले रहा है।

अमरावती और विदर्भ की राजनीति पर पड़ेगा सीधा असर
अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या नवनीत राणा भाजपा का साथ छोड़कर अजित पवार की राकांपा का दामन थामती हैं, और क्या विधायक रवि राणा अपनी युवा स्वाभिमान पार्टी का अस्तित्व खत्म कर उसे राकांपा में विलीन करने के लिए तैयार होते हैं। यदि यह सियासी समझौता हकीकत में बदलता है, तो आने वाले समय में अमरावती और पूरे विदर्भ क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।