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Nagpur

किसानों के खातों में सरकार डालेगी पांच हजार रूपये, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बोले- दीपावली में किसान की जेब खाली न रहे यह प्रयास


नागपुर: अकाल से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों के खातों में दीपावली से पहले 5 हजार रुपये जमा करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तय नियमों के तहत दीपावली से पहले राहत पहुंचाने का प्रयास है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में त्योहार के दौरान किसानों की जेब खाली न रहे, इसी उद्देश्य से सरकार ने यह आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है।

बैठक के बाद आयोजित संयुक्त पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य उपस्थित थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय की जानकारी दी।

1. अब 305 तहसीलों में सूखा घोषित, 12 रियायतें लागू
राज्य में शुरुआत में 265 तालुकों में सूखा घोषित किया गया था। इसके बाद विभिन्न तालुकों से प्राप्त मांगों और 'ट्रिगर-1' तथा 'ट्रिगर-2' के वैज्ञानिक मानदंडों की समीक्षा की गई। इस पुनर्मूल्यांकन के बाद 40 नए तालुकों को सूखा प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया गया है। अब राज्य के कुल 305 तालुकों में सूखा घोषित किया गया है। इन सभी प्रभावित तालुकों के लिए अक्टूबर महीने में ही पूरक शासन निर्णय जारी कर सूखा राहत से जुड़ी 12 महत्वपूर्ण रियायतें लागू की गई हैं।

2. दिवाली से पहले किसानों के खाते में 5,000 रुपये

सूखा राहत की पूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने में आमतौर पर दिसंबर तक का समय लग सकता है। ऐसे में किसानों की दिवाली अंधेरे में न बीते, इसके लिए सरकार ने अंतिम सूखा सहायता राशि में से 5,000 रुपये अग्रिम देने का निर्णय लिया है। यह राशि दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से जमा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य त्योहार के दौरान किसानों को तत्काल आर्थिक सहारा देना है।

कर्जमाफी की प्रक्रिया भी जारी: सरकार के अनुसार, किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। नए सिरे से लगभग 3.5 लाख किसानों की सूची प्रमाणित की गई है, जिससे पात्र किसानों के खातों में कर्जमाफी की राशि जमा होने का रास्ता साफ हुआ है।

3. पीने के पानी के लिए सख्त कदम, 16 हजार अवैध कनेक्शन

मराठवाड़ा के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। निरीक्षण कुओं में पानी का स्तर तीन मीटर से अधिक नीचे चले जाने वाले क्षेत्रों में अक्टूबर से ही टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू की गई है।

टैंकरों के वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए प्रत्येक टैंकर पर जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली अनिवार्य की गई है। वहीं, खेती और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नहरों तथा बांधों से अवैध रूप से पानी खींचने वाले 16 हजार कनेक्शन काटे गए हैं। सरकार ने भविष्य में भी अवैध जल उपसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

4. विद्यार्थियों की फीस माफ, एमएसपी पर खरीदा जाएगा चारा

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के बच्चों की शैक्षणिक और परीक्षा फीस माफ करने के लिए वर्ष 1992 का शासन निर्णय लागू था। हालांकि, इसमें कई कठिन शर्तों के कारण विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब मंत्रिमंडल ने इन शर्तों को हटाकर शैक्षणिक और परीक्षा शुल्क में छूट को व्यापक रूप से लागू करने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा, जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों, विविध कार्यकारी सहकारी समितियों और पतसंस्थाओं को किसानों से जबरन कर्ज वसूली नहीं करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। निजी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा भी किसानों पर कर्ज चुकाने का दबाव न बनाया जाए, इसके लिए प्रशासन उनसे बातचीत कर रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को 7.5 हॉर्सपावर तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। पुराने बिजली बिलों के लिए किसानों पर दबाव बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चारा संकट से निपटने के लिए सरकार की नई योजना

राज्य के कुछ क्षेत्रों में केवल 90 दिनों के लिए, जबकि अन्य क्षेत्रों में छह से सात महीने तक के लिए चारा उपलब्ध होने का अनुमान है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने किसानों से रबी ज्वार और अन्य चारा फसलों की खेती बढ़ाने की अपील की है।

सरकार के निर्णय के अनुसार, किसानों द्वारा उत्पादित चारे को शासन निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदेगा। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने और किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।

सरकार के इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देना, विद्यार्थियों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम करना, पीने के पानी की व्यवस्था मजबूत करना और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।