नागपुर में भाजपा की बड़ी परेशानी दूर, देवेंद्र फडणवीस ने बागी अनिल सोले को मनाया; CM के सामने पूर्व महापौर हुए भावुक, पार्टी के लिए काम करने की कही बात
नागपुर: महाराष्ट्र विधान परिषद् की नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की सबसे बड़ी परेशानी या कहें संकट को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री ने टिकट नहीं मिलने पर बागी बनकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे अनिल सोले को मना लिया। मुख्यमंत्री सोमवार रात को खुद सोले के घर पहुंचे और लंबी बातचीत की। मुख्यमंत्री ने सोले के सभी शिकायतों को दूर किया और उनकी मांगों पर पूरा करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद पूर्व विधायक ने सभी के सामने चुनाव से हटने और पार्टी के लिए काम करने की बात कही। इस दौरान बोलते हुए सोले भावुक भी हो गए, जहां पास में खड़े नेताओं ने उन्हें संभाला।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष पैदा हो गया था। अनिल सोले द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किए जाने से पार्टी के सामने चुनौती खड़ी हो गई थी। उनकी इस भूमिका से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के प्रचार और चुनावी रणनीति पर असर पड़ने की आशंका थी। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर विवाद सुलझाने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अनिल सोले से चर्चा की और उनकी नाराजगी के कारणों को समझने का प्रयास किया। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सोले की नाराजगी पार्टी नेतृत्व से नहीं, बल्कि संगठन में काम करने के तरीके से जुड़ी थी। सोले की मांग थी कि वर्षों से पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से संगठन की मुख्यधारा में लाया जाए और उन्हें उचित जिम्मेदारियां दी जाएं।
इन कार्यकर्ताओं को दोबारा काम करने का अवसर देने का आश्वासन मिलने के बाद सोले ने अपनी भूमिका बदलने का निर्णय लिया। इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुरोध का भी उल्लेख सोले ने किया।
पुराने कार्यकर्ताओं के लिए भावुक हुए सोले
अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा करते समय अनिल सोले भावुक नजर आए। उन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक किए गए काम, उनके साथ दिन-रात मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं और उन्हें मिलने वाले अवसरों के मुद्दे पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
सोले ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी को मजबूत करने के लिए काम किया है। इस सफर में अनेक कार्यकर्ताओं ने उनका साथ दिया। हालांकि, इनमें से कुछ कार्यकर्ता अब पार्टी की मुख्यधारा से दूर हो गए हैं। उनकी इच्छा थी कि इन कार्यकर्ताओं को फिर से अवसर मिले और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका दिया जाए।
सोले के मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया कि इन कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी जाएंगी और उन्हें दोबारा संगठन की मुख्यधारा में लाया जाएगा। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि पुराने कार्यकर्ताओं के योगदान को उचित महत्व देना उनकी प्रमुख मांग थी।
उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला
अनिल सोले ने जब अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्णय लिया, तब तक उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया था। सोले ने बताया कि वह देवली में प्रचार के लिए गए थे। इसी दौरान उन्हें फोन आया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर पहुंचे हैं। इसके बाद उन्होंने उनसे चर्चा करने के लिए वापस लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री के साथ बातचीत में पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से अवसर देने का आश्वासन मिला। इसके बाद सोले ने अपनी निर्दलीय उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि उनके फैसले से यदि पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को दुख पहुंचा है, तो वह उनसे माफी मांगते हैं।
सोले के इस फैसले से भाजपा के भीतर संभावित मत विभाजन का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि मतदाता सूची से नाम वापस लेने की समयसीमा समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया में सोले का नाम बने रहने की संभावना थी, लेकिन उन्होंने भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार की जीत के लिए प्रयास करने की बात कही।
सुधाकर कोहळे की जीत के लिए प्रचार करेंगे सोले
अनिल सोले ने अब सुधाकर कोहळे को चुनाव जिताने के लिए काम करने की तैयारी दिखाई है। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की उन्हें अच्छी जानकारी है और मतदाताओं के साथ उनका संपर्क भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में कोहळे के प्रचार अभियान में सोले की भूमिका अहम हो सकती है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी विश्वास जताया कि सोले प्रचार की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने बताया कि निर्वाचन क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों और प्रचार की योजना बनाने की जिम्मेदारी चंद्रशेखर बावनकुले को सौंपी गई है। इस बैठक में पार्टी के अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद थे। बातचीत के बाद विवाद का समाधान निकलने से भाजपा के स्थानीय संगठन को राहत मिलने की बात सामने आई।
गिरीश व्यास ने भी वापस लिया इस्तीफा
अनिल सोले के साथ गिरीश व्यास द्वारा भी अपना इस्तीफा वापस लेने की खबर है। इससे नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव से पहले भाजपा में पैदा हुए असंतोष को कम करने की दिशा में पार्टी के प्रयास सामने आए हैं। पुराने कार्यकर्ताओं को संगठन में फिर से सक्रिय करना, नाराज नेताओं से संवाद करना और आधिकारिक उम्मीदवार के समर्थन में सभी को एकजुट करना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दे रहा है।
कुल मिलाकर, अनिल सोले की निर्दलीय उम्मीदवारी से भाजपा के सामने पैदा हुई चुनौती को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया गया। देवेंद्र फडणवीस की मध्यस्थता के बाद सोले ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की, जिससे पार्टी के भीतर चल रहा विवाद फिलहाल शांत होता दिखाई दिया।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुराने कार्यकर्ताओं को दिए गए आश्वासन पर कितना अमल होता है और सुधाकर कोहळे के प्रचार अभियान में अनिल सोले कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
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