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Akola

Akola News: अकोला में 1101 जन्म प्रमाणपत्रों का मामला, 4 तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारियों पर FIR


Akola Birth Certificate Case: महाराष्ट्र के अकोला जिले के अलेगांव ग्राम पंचायत में जन्म पंजीकरण में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। 1101 जन्म प्रविष्टियों के मामले में चार तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। विशेष जांच दल मामले की पड़ताल कर रहा है।

अकोला: महाराष्ट्र के अकोला जिले से जन्म प्रमाणपत्रों में कथित अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले की अलेगांव ग्राम पंचायत में वर्ष 2025 के दौरान दर्ज की गई 1101 जन्म प्रविष्टियों को लेकर सवाल उठे हैं। मामले की जांच के बाद चार तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारियों के खिलाफ चान्नी पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई है। इस प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन में हलचल पैदा कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जन्म पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान कुछ प्रविष्टियों के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित जन्म प्रमाणपत्र किन दस्तावेजों और किस प्रक्रिया के आधार पर जारी किए गए थे।

1101 जन्म प्रविष्टियों की जांच, 26 मामलों में दस्तावेज नहीं मिले

अलेगांव ग्राम पंचायत में वर्ष 2025 के दौरान कुल 1101 जन्म प्रविष्टियां दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन प्रविष्टियों की जांच के दौरान 41 रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 26 मामलों में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए। जांच में कथित तौर पर कुछ अन्य प्रक्रियागत अनियमितताओं के संकेत भी मिले। इनमें जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन उपलब्ध नहीं होना और शुल्क से संबंधित रिकॉर्ड में कमी जैसी बातें शामिल हैं।

हालांकि, इन तथ्यों के आधार पर सभी 1101 जन्म प्रविष्टियों को फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

चार तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारियों के खिलाफ FIR

इस मामले में अतिरिक्त जिला स्वास्थ्य अधिकारी शशिकांत पवार की शिकायत के आधार पर चान्नी पुलिस थाने में चार तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट में जिन अधिकारियों के नाम बताए गए हैं, उनमें आर. एच. देशमुख, जे. पी. तायडे, पी. एम. निमसरकार और गणेश जाधव शामिल हैं।

पुलिस जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं कैसे हुईं और संबंधित रिकॉर्ड तैयार करने में किन लोगों की भूमिका थी। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता। मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका जांच के बाद स्पष्ट होगी।

जिलाधिकारी के निर्देश पर विशेष जांच दल

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्तर पर विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। भाजपा नेता किरीट सोमैया की शिकायत के बाद इस प्रकरण ने और ध्यान आकर्षित किया।

जांच का मुख्य उद्देश्य जन्म पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेजों और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया का सत्यापन करना है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि संबंधित प्रविष्टियां नियमानुसार की गई थीं या नहीं।

CRS पोर्टल पर जन्म पंजीकरण को लेकर भी सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, अलेगांव ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र और गोलेगांव से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठे हैं। गोलेगांव के लिए अलग पहचान संख्या होने के बावजूद अलेगांव ग्राम पंचायत के CRS पोर्टल के माध्यम से कुछ जन्म प्रविष्टियां किए जाने का मुद्दा सामने आया है। अब इस पहलू की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि संबंधित पोर्टल का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया गया और क्या सभी प्रविष्टियां निर्धारित नियमों के अनुसार दर्ज की गई थीं।

1101 जन्म प्रमाणपत्रों के मामले में आगे क्या होगा?

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि 1101 जन्म प्रविष्टियों में से कितनी प्रविष्टियां नियमों के अनुसार की गई थीं और कितने मामलों में दस्तावेजों या पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आती हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति क्या थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल मामले में दर्ज FIR और जांच की प्रगति पर नजर बनी हुई है।