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महंगाई डायन खाए जात है! 42 में से 41 जरूरी चीजों के दाम बढ़े, प्याज 113% महंगा; तेल, दाल और चीनी ने भी बिगाड़ा बजट


नागपुर/नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में निगरानी वाली 42 आवश्यक वस्तुओं में से 41 के खुदरा दाम बढ़ गए हैं। प्याज की कीमतों में करीब 113 प्रतिशत की सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, चीनी और सूरजमुखी का तेल भी महंगा हुआ है। 

प्याज के दाम में 113% की उछाल
महंगाई की सबसे बड़ी मार प्याज पर पड़ी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्याज की कीमतों में पिछले एक साल में लगभग 113 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 12 अक्टूबर को प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।

महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में अनुमानित 5 से 7 प्रतिशत की कमी को कीमतों में तेजी की एक वजह माना जा रहा है। खेती का रकबा घटने और मानसून में देरी के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, बाजार में नई खरीफ फसल की आवक बढ़ने पर कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

चीनी 22% और सूरजमुखी तेल 18% महंगा
रसोई के बजट पर असर डालने वाली दूसरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक साल के दौरान चीनी के दाम करीब 22 प्रतिशत और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आज मंगलवार 13 अक्टूबर को चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 56 रुपये प्रति किलो रहा। वहीं, सूरजमुखी का तेल लगभग 191 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया।

इसके अलावा, पाम तेल की कीमतों में करीब 15.2 प्रतिशत और सोया तेल में लगभग 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सरसों का तेल भी एक साल पहले के करीब 188 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 204 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया।

दाल और चावल भी महंगे, आम आदमी की बढ़ी परेशानी
रोजाना के भोजन में इस्तेमाल होने वाली दालों और अनाज की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। अरहर यानी तूर दाल का औसत खुदरा भाव करीब 129 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह लगभग 113 रुपये था। चना दाल की कीमत भी पिछले साल के करीब 85 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 91 रुपये प्रति किलो हो गई।

सामान्य चावल के औसत भाव में लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसकी कीमत करीब 47 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। गेंहू और आटे की कीमतों में अपेक्षाकृत मामूली बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद, खाने-पीने की कई जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से घरेलू खर्च पर दबाव बढ़ रहा है।

 सितंबर में खुदरा महंगाई 5.5% तक पहुंची

महंगाई के दबाव का असर देश की खुदरा महंगाई दर पर भी दिखाई दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर करीब 5.5 प्रतिशत हो गई। खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत दर्ज की गई। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को महंगाई में तेजी की प्रमुख वजहों में से एक माना गया है। ऐसे में आम परिवारों के लिए मासिक बजट संभालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

आलू की कीमतों में गिरावट, लेकिन राहत सीमित
जहां अधिकांश जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, वहीं आलू एकमात्र ऐसी वस्तु रही जिसकी कीमत में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, प्याज, तेल, चीनी, दाल और चावल के बढ़ते दामों के मुकाबले यह राहत सीमित है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चना दाल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार अपने भंडार से चना बाजार में उतारने पर विचार कर सकती है। कुल मिलाकर पिछले एक साल में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने आम परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ाया है। अब निगाहें नई फसल की आवक, बाजार में खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।