नायलॉन मांजे पर हाईकोर्ट सख्त; नागपुर में दो केस बताने पर सरकार को फटकार, 30 जनवरी तक हलफनामा दाखिल करने के आदेश
नागपुर: नागपुर में प्रतिबंधित नायलॉन मांजे की खुलेआम बिक्री और इस्तेमाल को लेकर अब सरकारी अधिकारी ही हाईकोर्ट के निशाने पर आ गए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार के जवाब पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए साफ कहा है कि गलत या भ्रामक जानकारी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने 30 जनवरी तक निष्पक्ष और तथ्यात्मक हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
मकर संक्रांति के दौरान प्रतिबंधित नायलॉन मांजे की बिक्री और उसके उपयोग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नागपुर जिले में केवल दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोड़ की पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि नायलॉन मांजे की बिक्री सभी ने देखी है, ऐसे में गलत या भ्रामक बयान स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि हलफनामे में गलत जानकारी दी गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।हाईकोर्ट ने पहले ही आदेश जारी करते हुए नायलॉन मांजे के उपयोग और बिक्री पर भारी जुर्माने तय किए हैं। वयस्क द्वारा नायलॉन मांजा इस्तेमाल करने पर 25 हजार रुपये, नाबालिग के मामले में अभिभावक से 25 हजार रुपये और मांझा बेचने या आपूर्ति करने वालों पर ढाई लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
जुर्माने की राशि के प्रबंधन के लिए जिलाधिकारी, मनपा आयुक्त और हाईकोर्ट रजिस्ट्रार की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।अदालत ने नायलॉन मांजे से घायल हुए नागरिकों और पक्षियों की जानकारी भी मांगी है और जिन इलाकों में घटनाएं हुई हैं, वहां के पुलिस निरीक्षकों और उपायुक्तों के नाम पेश करने के निर्देश दिए हैं।नायलॉन मांजे से होने वाली गंभीर दुर्घटनाओं और जानलेवा खतरे को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है।
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