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Vidarbha Sahitya Sangh Election: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हस्तक्षेप के आरोपों को किया ख़ारिज, कहा- मेरा चुनाव से कोई लेना देना नहीं


नागपुर: विदर्भ साहित्य संघ के चुनाव (Vidarbha Sahitya Sangh Election) की रणभूमि सज चुकी है और चुनाव में शामिल होने वाले नेताओं ने जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी बीच, श्रीपद भालचंद्र जोशी (Shripad Bhalchandra Joshi) ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) पर संघ के चुनाव में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने इसे निराधार बताया। खुद को विदर्भ साहित्य संघ का हितचिंतक बताते हुए उन्होंने कहा, "चुनाव से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साहित्य के क्षेत्र में गैर-साहित्यक लोगों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।"

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने श्रीपद जोशी के नाम पत्र जारी करते हुए कहा, "पिछले कुछ दिनों से मीडिया में विदर्भ साहित्य संघ के चुनाव प्रक्रिया में मेरे दखल या हिस्सा लेने की खबरें छप रही हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहता हूँ कि इनमें कोई सच्चाई नहीं है। इसके विपरीत, मैं हमेशा मानता हूँ कि नेताओं, बिजनेसमैन या लिटरेरी फील्ड से बाहर के लोगों को लिटरेरी संस्थाओं में कभी हस्तक्षेप नहीं देना चाहिए। इसलिए इस चुनाव में दखल देने का सवाल ही नहीं उठता।"

गडकरी ने आगे कहा, "मैं विदर्भ साहित्य संघ का शुभचिंतक हूँ और हमेशा इस संस्था की भलाई के बारे में ही सोचता रहा हूँ, जिसकी सौ साल की समृद्ध परंपरा रही है। मेरी निजी राय है कि मौजूदा ढांचे को मजबूत करते हुए वहां लिटरेरी और थिएटर मूवमेंट के लिए एक बड़ा, समग्र ढांचा बनाया जाना चाहिए। इस संस्था में केवल साहित्य और थिएटर से जुड़ी गतिविधियाँ होनी चाहिए। नए लेखकों को प्रोत्साहन मिले और पुराने जान-पहचान वाले सम्मानित हों यही मेरी प्राथमिकता और उम्मीद है।"



केंद्रीय मंत्री ने कहा, "विदर्भ साहित्य संघ के अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव उस संस्था से जुड़ा एक प्रक्रिया है। आज तक मेरा इस चुनाव से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है और भविष्य में भी रहेगा। इसमें मेरे शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बल्कि, चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए जिन भी उम्मीदवारों ने नामांकन किया है, उनसे मेरे व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं।"

केंद्रीय मंत्री ने सभी को भविष्य की शुभकामाएं और सुझाव देते हुए कहा कि, "मेरा मानना है कि सभी को एक साथ बैठकर, बिना चुनाव कराए, एकमत से अध्यक्षों और सदस्यों का चयन करना चाहिए, ताकि विदर्भ के साहित्य क्षेत्र में नए सिरे से गति और सकारात्मक माहौल बन सके। यह विशेष रूप से विदर्भ साहित्य संघ के 100वें वर्ष के अवसर पर एक सार्थक कदम होगा।"