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Washim: कारंजा शहर में खसरे के संदिग्ध 9 बच्चे मिलने से सनसनी


कारंजा लाड: कारंजा शहर में खसरे के 9 संदिग्ध बच्चे मिलने से हड़कंप मच गया है. 6 और बच्चों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आना बाकी है. खसरा एक विषाणु से होने वाला रोग है. खसरा का विषाणु रोगी की खाँसी के माध्यम से हवा के माध्यम से फैलता है. संपर्क में आने वाले व्यक्ति की सांस के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है. 

स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों व उनके अभिभावकों से अपील की है कि इस बीमारी के लक्षण मिलने पर वे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें और बिना घबराए सावधानी बरतें. यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले तीन दिनों में कराए गए सर्वे से सामने आई है. 

कारंजा शहर की आबादी 93,970 है और 6 माह से 5 वर्ष तक के 10,863 बच्चे हैं जिनमें 9 संदिग्ध हैं तथा 6 बच्चों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं. शरीर पर लाल चकत्ते और आंखें लाल होना खसरे के लक्षण हैं. साथ ही खसरे के वायरस के शरीर में प्रवेश करने के सात से दस दिन बाद लक्षण दिखने लगते हैं. शुरुआत में बुखार, खांसी, जुकाम, आंखें लाल होना एक या दो या तीनों लक्षण हो सकते हैं. दो-चार दिनों के बाद शरीर के सभी अंगों, कान के पीछे, चेहरे, छाती और पेट पर दाने निकल आते हैं. 

खसरे के रोगी को लगातार दो दिनों तक विटामिन ए देने से रोग की गंभीरता कम हो जाती है. खसरे से बचाव के लिए टीकाकरण एक प्रभावी तरीका है और टीका हर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध है. टीकाकरण अनुसूची के अनुसार टीकाकरण किया जाए तो खसरे को रोका जा सकता है. स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से सावधानी बरतने की अपील की है. 

बच्चों को खसरा और रूबेला का टीका नहीं लगाया गया है, तो उन्हें अवश्य ही टीका लगाया जाना चाहिए. टीके की पहली खुराक 9 महीने से 12 महीने के बीच और दूसरी खुराक 16 से 24 महीने के बीच दी जाती है. खसरे के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अपने नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें और डॉक्टर से सलाह लें. ऐसी अपील स्वास्थ्य विभाग ने की हैं.