Amravati: महज एक महीने में पानी की किल्लत की चपेट में मेलघाट के 38 और गांव
अमरावती: अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में भीषण गर्मी के साथ जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि एक महीने के भीतर पानी की कमी से प्रभावित गांवों की संख्या में 38 गांवों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ते संकट के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। अप्रैल में जहां 46 गांवों में जल संकट से निपटने के लिए 53 उपाय लागू किए गए थे, वहीं मई में यह संख्या बढ़कर 84 गांवों में 93 उपायों तक पहुंच गई है। इसके बावजूद एक महीने में 38 और गांव जल संकट की चपेट में आ गए हैं। मेलघाट के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में हालात बेहद गंभीर हैं, जहां महिलाएं कई-कई किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। सूखी नदी की धाराएं, खाली बर्तन और बंद पड़े हैंडपंप इस जल संकट की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। कई गांवों में बच्चे और बुजुर्ग भी पानी की तलाश में लंबी दूरी तय कर रहे हैं, जबकि टैंकर का इंतजार ग्रामीणों की रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है।
चिखलदरा तहसील के 9 गांवों में 21 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। वहीं जिले के 84 गांवों में 32 बोरवेल और 61 निजी कुओं का अधिग्रहण कर किसी तरह जल व्यवस्था को संभाला जा रहा है। सबसे अधिक दर्दनाक स्थिति चिखलदरा और धारणी तहसील में देखने को मिल रही है, जहां पहाड़ी क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। महिलाएं सिर पर मटके रखकर लंबी दूरी तय कर रही हैं, जबकि बच्चे प्यास से बेहाल नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रोज कई किलोमीटर चलकर पानी लाना पड़ता है। गर्मी बहुत है, लेकिन मजबूरी है। मोर्शी, वरुड, नांदगांव खंडेश्वर और चांदूर रेलवे जैसे क्षेत्रों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत बरकरार है। हालांकि मानसून कुछ ही हफ्तों दूर है, लेकिन तब तक जल संकट प्रशासन के सामने एक बड़ी और गंभीर चुनौती बना गया है।
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