विदर्भ में मानसून पर लगा 'ब्रेक': भीषण उमस से जनजीवन बेहाल, महासागरीय चक्रवात के कारण हवाओं ने बदला रुख
अमरावती: अमरावती सहित पूरे विदर्भ क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से मानसून की रफ्तार पूरी तरह थम गई है, जिससे समूचा इलाका एक बार फिर भीषण गर्मी और उमस की चपेट में आ गया है। जून के आखिरी और जुलाई के शुरुआती सप्ताह में हुई लगातार और भारी बारिश के बाद अचानक मौसम का मिजाज बदल गया है। बादलों के पूरी तरह गायब होने से दिन का तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस ऊपर चला गया है, जिसके कारण आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।
दूसरी तरफ, बारिश पर लगे इस अचानक ब्रेक ने विदर्भ के किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। जिन किसानों ने शुरुआती बारिश के भरोसे बुवाई का काम पूरा कर लिया था, उनकी फसलें अब पानी की कमी के कारण सूखने लगी हैं। इसके अलावा, विदर्भ के प्रमुख बांधों और जलाशयों में भी अब तक केवल 30 से 40 फीसदी ही जलभराव हो पाया है, जिससे आने वाले दिनों में फसलों के साथ-साथ पीने के पानी का गंभीर संकट (जलकिल्लत) पैदा होने की आशंका गहरा गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सैटेलाइट और उपग्रह से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश के करीब 70 से 80 प्रतिशत भूभाग से मानसूनी बादल पूरी तरह साफ हो चुके हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने इस अप्रत्याशित बदलाव के पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण बताया है। उनके मुताबिक, इस समय पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक अत्यंत शक्तिशाली चक्रवात (Typhoon) सक्रिय हो गया है।
यह चक्रवात हिंद महासागर और अरब सागर से भारत की मुख्य भूमि की ओर आने वाली नमी युक्त मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींच रहा है। हवाओं का रुख बदलने के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में आने वाले मानसून की ताकत बेहद कमजोर पड़ गई है, जिसके परिणामस्वरूप कई राज्यों में मौसम पूरी तरह शुष्क हो गया है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि हालांकि जुलाई महीने की कुल बारिश औसत के आसपास ही रहेगी, लेकिन मानसून को दोबारा पूरी तरह सक्रिय होने में अभी कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। विभाग ने विदर्भ के किसानों को फिलहाल सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने और मौसम के अद्यतन पूर्वानुमानों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
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