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Amravati: शिक्षकों को सरकार की बड़ी राहत: अब हर रोज नहीं भरना होगा डेटा; लागू हुआ 'माहितीचा वार शनिवार' उपक्रम


अमरावती: महाराष्ट्र के सरकारी और अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को रोजाना अनगिनत प्रशासनिक रिपोर्ट, आंकड़े और ऑनलाइन जानकारियां भेजने के भारी मानसिक तनाव से आखिरकार बड़ी मुक्ति मिल गई है। राज्य सरकार ने शिक्षकों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला लेते हुए 'माहितीचा वार शनिवार' (Information Day Saturday) नामक नया उपक्रम लागू करने की घोषणा की है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल के प्रधानाध्यापकों (मुख्याध्यापकों) और शिक्षकों को हर रोज केवल तीन अत्यंत आवश्यक जानकारियां (डेटा एंट्री) ऑनलाइन दर्ज करनी होंगी। इसके अलावा अन्य सभी प्रकार की प्रशासनिक और विभागीय जानकारियां अब हफ्ते में सिर्फ एक बार, यानी शनिवार के दिन ही जमा करनी होंगी।

रोजाना सिर्फ इन 3 बातों की होगी एंट्री
नए नियमों के अनुसार, शिक्षकों के अध्यापन के समय को बचाने के लिए दैनिक रिपोर्टिंग के दायरे को बेहद सीमित कर दिया गया है। अब प्रतिदिन केवल निम्नलिखित तीन जानकारियां ही पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।

  • विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति (Student Attendance)
  • शिक्षकों की उपस्थिति (Teacher Attendance)
  • मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) से जुड़ी जरूरी जानकारी

इन तीन जरूरी एंट्रीज को छोड़कर बाकी सभी प्रकार के प्रशासनिक अहवाल, छात्रों के विस्तृत आंकड़े, विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी, सर्वेक्षण (Surveys) और अन्य विभागीय फाइलों का काम अब शनिवार को एक साथ निपटाया जा सकेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा एक एकीकृत (Combined) व्यवस्था तैयार की गई है।

पढ़ाई की गुणवत्ता में आएगा सुधार
गौरतलब है कि पिछले काफी समय से विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा यह शिकायत लगातार की जा रही थी कि बार-बार और हर रोज मांगे जाने वाले ऑनलाइन डेटा के चक्कर में शिक्षकों का ज्यादातर समय मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर ही बीत जाता है। इसका सीधा और बुरा असर छात्रों की पढ़ाई (अध्ययन-अध्यापन) पर पड़ रहा था।

सरकार के इस नए फैसले से अब अनावश्यक रूप से रोज-रोज जानकारी मांगने की प्रथा पर पूरी तरह लगाम लगेगी। इसका सीधा फायदा अमरावती जिले सहित पूरे महाराष्ट्र की प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शालाओं के हजारों शिक्षकों और लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा। गैर-शैक्षणिक काम कम होने से शिक्षक अब अपनी पूरी ऊर्जा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में लगा सकेंगे।