Bhandara: दावों और हकीकत की खुली पोल! जर्जर स्कूल की छत के नीचे 'इंटरनेशनल' पढ़ाई का सपना
भंडारा: महाराष्ट्र के शिक्षा राज्यमंत्री और भंडारा जिले के पालकमंत्री पंकज भोयर ने हाल ही में जिला परिषद स्कूलों में 'इंटरनेशनल लेवल' की शिक्षा पद्धति लागू करने का दावा किया था। लेकिन भंडारा के साकोली तहसील से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो दावों के बिल्कुल विपरीत हैं। केसलवाड़ा की जिला परिषद स्कूल में बच्चे दरकी हुई छतों और जर्जर वर्गखोलियों के साये में पढ़ने को मजबूर हैं। पालकों में गहरा आक्रोश है और वे पूछ रहे हैं कि अगर कोई हादसा हुआ, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
एक तरफ सरकार जिला परिषद स्कूलों को हाई-टेक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ साकोली के केसलवाड़ा स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का भी अकाल है। यहाँ की वर्गखोलियों की छतों पर बड़े-बड़े तड़ें पड़ चुके हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। छात्र इसी डर के साये में अपनी पढ़ाई पूरी करने को मजबूर हैं।
स्कूल की दुर्दशा का आलम यह है कि यहाँ चार कक्षाओं के लिए महज एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि 32 छात्र एक ही कमरे में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। पालकमंत्री पंकज भोयर ने खेल महोत्सव के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर के अध्यापन का वादा किया था, लेकिन स्कूल की दीवारों पर पड़ी ये दरारें सरकार की पोल खोल रही हैं। आक्रोशित पालकों का कहना है कि जब बच्चों के बैठने के लिए सुरक्षित छत ही नहीं है, तो अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की बातें बेमानी हैं।
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