Buldhana: मक्का उत्पादक किसानों की बढ़ी मुश्किलें; सरकारी खरीदी की समय सीमा खत्म, 70% फसल अब भी घरों में कैद
बुलढाणा: सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मक्का बेचने की उम्मीद लगाए बैठे बुलढाणा के किसानों के लिए आज का दिन मायूसी भरा रहा। शासन द्वारा दी गई 31 मार्च की समय सीमा आज समाप्त हो गई है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले के अधिकांश किसानों की उपज अभी तक खरीदी ही नहीं गई है।
लक्ष्य पूरा, पर किसान अब भी कतार में
बुलढाणा जिले में मक्का खरीदी के लिए जो लक्ष्य (Target) और समय सीमा तय की गई थी, वह आज खत्म हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक केवल 30 प्रतिशत पंजीकृत किसानों की ही मक्का खरीदी जा सकी है। इसका मतलब है कि पंजीकरण कराने वाले 70 प्रतिशत किसानों के घरों में मक्का की फसल अब भी वैसी ही पड़ी है।
निजी मंडियों में औने-पौने दाम
किसानों का सरकारी केंद्रों की ओर रुझान इसलिए अधिक है क्योंकि निजी बाजारों (Private Market) में मक्के के दाम बेहद कम मिल रहे हैं। व्यापारियों द्वारा दिए जा रहे कम भाव के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकारी हमीभाव केंद्र ही उनकी आखिरी उम्मीद थे, लेकिन लक्ष्य और मुद्दत खत्म होने से किसान अब आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
किसानों की मांग: बढ़ाया जाए 'लक्ष्य' और 'समय'
बुलढाणा के किसानों ने सरकार और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि, मक्का खरीदी के लिए उद्देश्य (Target) बढ़ाया जाए। सरकारी केंद्रों की कार्य अवधि (Deadline) में मुदतवाढ (एक्सटेंशन) दी जाए। जिन किसानों ने पंजीकरण कराया है, उन सभी की फसल एमएसपी पर खरीदी जाए।
हम कर्ज कैसे चुकाएंगे?
किसान ने कहा, "हमने समय पर पंजीकरण कराया था, लेकिन केंद्र पर नंबर ही नहीं आया। अब अगर सरकार ने समय नहीं बढ़ाया तो हमें अपनी फसल व्यापारियों को आधे दाम पर बेचनी पड़ेगी। हम कर्ज कैसे चुकाएंगे?"
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