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Nagpur

314 Cr IT Notice Case: आईटी के पहले ED भी भेजा चूका है नोटिस, पूछताछ के लिए बुलाया था विशाखापट्नम


नागपुर: आयकर विभाग द्वारा चंद्रशेखर कोहाड़ नामक मजदूर को 314 करोड़ रुपए वसूली के लिए नोटिस भेजने वाले मामले पर बड़ी जानकारी सामने आई है। इसके तहत आईटी के पहले मजदुर को प्रवर्तन निदेशालय का समन भी आ चूका है। ईडी द्वारा 2020 में यह समन भेजा गया था, हालांकि, तब मजदुर ने नजरअंदाज करते हुए समन का कोई जवाब नहीं दिया था। 

ज्ञात हो कि, आयकर विभाग ने कोहाड़ 314 करोड़ रूपये की कर वसूली के लिए नोटिस भेजा है। साझा किए गए कागजात से पता चलता है कि उन्हें मूल रूप से 2011-12 से 2015-16 के दौरान की गई आय के लिए 185 करोड़ रुपये की कर मांग की गई थी। ब्याज जोड़ने के बाद यह बढ़कर 314 करोड़ रुपये हो गया। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने कथित तौर पर इतवारी इलाके में एक सहकारी ऋण सोसायटी में अपने खाते में बड़ी रकम प्राप्त की। कोहाड़ का दावा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके खाते में करोड़ों रुपये की धनराशि आ रही है।

2020 में उन्हें ईडी के विजाग कार्यालय द्वारा समन भेजा गया था। कोहाड़ का कहना है कि उन्होंने जवाब नहीं दिया क्योंकि वह विशाखापत्तनम कार्यालय में जाने में सक्षम नहीं थे। गलवार को भी कोहाड़ मध्य प्रदेश के मुलताई से 121 किलोमीटर बाइक चला कर नागपुर पहुंचे और आयकर विभाग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हलाँकि, छुट्टी होने के कारण कोहाड़ नोटिस देने वाले अधिकरी से मिल नहीं पाए। अन्य कर्मचारियों ने सलाह दी कि वह आयकर आयुक्त के पास अपील दायर कर सकता है

चंद्रशेखर कोहाड़ का दावा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके खाते में करोड़ों रुपये की धनराशि आ रही है। मूल रूप से नागपुर के रहने वाले कोहाड़ अब मुलताई में रहते हैं, जहां उन्हें नोटिस दिया गया था। इसमें 42 फर्जी कंपनियों की सूची थी। एजेंसी ने कोहाड़ से पूछा की गई कि क्या उनका इन संस्थाओं के साथ कभी कोई लेन- देन हुआ था।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के पास मौजूद दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि कंपनी का संबंध विशाखापत्तनम में चल रहे 560 करोड़ रुपये के हवाला घोटाले से है, जहां से कोहाड़ को ईडी का नोटिस मिला था।घोटाले के सरगना महेश वड्डी, जिन्हें 2017 में गिरफ्तार किया गया था, को इन कंपनियों में से एक दर्जन से अधिक कंपनियों में किसी समय निदेशक पाया गया था। कम से कम पांच में, वह निदेशक बने हुए हैं। ईडी नोटिस में उल्लिखित कई कंपनियाँ पहले से ही जांच के दायरे में हैं। नोटिस में पहली संस्था पद्मप्रिया स्टोन क्रशिंग प्राइवेट लिमिटेड, विशाखापत्तनम में स्थित है, जहाँ वड्डी का निवास है। अधिकांश अन्य कंपनियों के पंजीकृत पते कोलकाता में हैं। छह एक ही पते पर स्थित हैं- 840/2 लेक टाउन, कोलकाता। बाकी के पंजीकृत पते दिल्ली, पुणे और सिकंदराबाद में हैं।

कोहाड़ को यह कर नोटिस तब मिला जब सहकारी बैंक में जमा राशि के आधार पर उनके नाम पर भारी आय दर्ज की गई। कोहाड़ का कहना है कि उन्हें सोसायटी का नाम ठीक से याद नहीं है। उन्होंने बताया, "यह श्रीनाथ मंगलम सहकारी सोसायटी या शायद मंगलम को- ऑपरेटिव है, जो इतवारी में टांगा स्टैंड के पास स्थित है।" कोहाड़ ने कहा कि वह अपना पैसा सहकारी समिति में रखना पसंद करते हैं क्योंकि वहां से वह रोजाना कलेक्शन एजेंट के पास जा सकते हैं। अब, उन्हें पैसे जमा करने की भी जरूरत नहीं है। वह यह नहीं बता सकता कि उसके खाते में कितना पैसा था। वह कहता है कि घोटाले के बाद सोसायटी के खाते सील कर दिए गए थे।

कोहाड़ का कहना है कि 10-15 अन्य लोगों के खातों में भी बड़ी रकम जमा हुई है। उनका आरोप है कि सहकारी समिति के प्रबंधन ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए उनके खाते का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा, "मुझे यह भी नहीं पता था कि खाते में कितना पैसा आया। अगर टैक्स देनदारी ही 314 करोड़ रुपये है, तो कल्पना कीजिए कि इसमें कितना पैसा गया होगा।" शाम तक, थके हुए कोहाड़ ने एक दिन के लिए नागपुर में रहने का फैसला किया। उनके साथ आए उनके दोस्तों ने बताया कि उनके पास कोई साधन नहीं है। उन्होंने बताया कि मुलताई में भी वे किराए के घर में रहते हैं और उनके लिए मुश्किल से गुजारा हो पाता है।