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Chandrapur

Chandrapur: अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड डॉ. रवींद्र पालसिंह 10 दिनों की पुलिस रिमांड पर; कोर्ट में 3 घंटे चली बहस


चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के नागभीड से जुड़े बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी (किडनी रैकेट) मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड डॉ. रवींद्र पालसिंह को अदालत ने 10 दिनों की यानी 7 जुलाई तक पुलिस कोठडी (पुलिस रिमांड) में भेज दिया है। शनिवार को ब्रह्मपुरी कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच करीब तीन घंटे तक चली तीखी बहस के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।

सरेंडर के बाद पुलिस ने चला 'प्रोडक्शन वारंट' का दांव
बता दें कि आरोपी डॉ. रवींद्र पालसिंह ने पिछले दिनों ब्रह्मपुरी कोर्ट में बेहद नाटकीय अंदाज में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया था। हालांकि, चंद्रपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद तेजी से कानूनी कदम उठाए और कोर्ट से आरोपी का 'प्रोडक्शन वारंट' हासिल किया। इसके बाद पुलिस ने उसे जेल से अपनी कस्टडी में लेकर दोबारा कोर्ट में पेश किया।

अदालत में 3 घंटे तक चली जोरदार जिरह
डॉ. सिंह की पुलिस कस्टडी को लेकर सरकारी वकील और बचाव पक्ष के वकील के बीच अदालत में जोरदार बहस हुई। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इस रैकेट के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़े हैं। इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने, पैसों के लेन-देन और पीड़ितों का पता लगाने के लिए आरोपी से गहन पूछताछ जरूरी है। पुलिस ने इसके लिए कोर्ट के सामने पुख्ता सबूत भी पेश किए।

आरोपी के वकीलों ने पुलिस के दावों को खारिज करने और रिमांड का विरोध करने की पूरी कोशिश की। हालांकि, अपराध की गंभीरता और पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस दस्तावेजों को सही मानते हुए माननीय न्यायालय ने डॉ. रवींद्र पालसिंह को 10 दिनों की पुलिस रिमांड पर सौंपने का आदेश दिया।

दूसरा डॉक्टर अब भी फरार
पुलिस के अनुसार, इस पूरे अंतरराष्ट्रीय रैकेट में डॉ. पालसिंह के साथ मिलकर काम करने वाला दूसरा मुख्य आरोपी डॉ. गोविंदस्वामी अभी भी फरार है। पुलिस की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन खंगालेगी पुलिस
10 दिनों की पुलिस कस्टडी मिलने के बाद अब चंद्रपुर पुलिस डॉ. रवींद्र पालसिंह से कड़ाई से पूछताछ करेगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन से बड़े अस्पताल या डॉक्टर शामिल हैं, अब तक कितने लोगों की किडनी निकाली जा चुकी है और इस अवैध कारोबार का पैसा कहाँ-कहाँ ट्रांसफर किया गया है।