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Gondia: बड़ी संख्या में लोग हो रहे डिप्रेशन का शिकार, पिछले छह महीने में 169 ने आत्महत्या का किया प्रयास


गोंदिया. मानसिक रोग, हताश, पारिवारिक तनाव, प्रेम प्रसंग और कर्ज से ग्रस्त व्यक्ति आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं.    तनाव में वे स्थिति से लड़ने और आत्महत्या का रास्ता अपनाने का साहस खो देते हैं.  जिले में पिछले छह माह के हालात को देखते हुए यह जानकारी सामने आई जिसमें 169 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया है. इसमें 18 साल से कम उम्र के 15 प्रश. लड़के और लड़कियों का समावेश है.  इन आंकड़ों के अनुसार, हर दिन कम से कम एक व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करता है.

कोरोना ने सामाजिक और आर्थिक स्थिति को अस्त-व्यस्त कर दिया. इससे कई लोगों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है. कई परिवार अपना परिवार जैसे तैसे पाल रहे है. कोरोना के कारण कई लोगों की नौकरी चली गई है. इससे लोग  मानसिक तनाव में हैं. हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है. एक जानकारी के अनुसार देश  में हर घंटे एक छात्र आत्महत्या करता है. इस समस्या को गंभीरता से लेकर सभी स्तर पर सार्थक जनजागृती की आवश्यकता है.  

गोंदिया के वैद्यकीय महाविद्यालय कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2022 तक छह महीने की अवधि में 169 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया. आत्महत्या का प्रयास करने के बाद उसे इलाज के लिए गोंदिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. आत्महत्या ओं की वास्तविक संख्या बहुत अधिक है. अकेले गोंदिया मेडिकल कॉलेज में आत्महत्या का प्रयास करने वाले 169 लोगों को भर्ती कराया गया.  

जानकारी के अनुसार अप्रैल माह में 17 पुरूष व 10 महिला, मई में 21 पुरूष व 3 महिला, जून में 23 पुरूष व 7 महिला, जुलाई में 22 पुरूष व 11 महिला, अगस्त में 21 महिला व 6 महिला तथा सितंबर में 19 पुरूष व 9 महिलाओं ने आत्हत्या करने का प्रयास किया.

अपराध के डर से भर्ती नहीं करते

2017 से पहले, कानून के तहत आत्महत्या का प्रयास एक अपराध था. कानून की धारा 309 के तहत मामला दर्ज करना इसमें 1 साल कैद या 50 हजार रु. जुर्माने का प्रावधान था लेकिन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के तहत आत्महत्या का प्रयास अपराध नहीं है. आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों को उनके रिश्तेदार इलाज के लिए डॉक्टरों के पास नहीं ले गए क्योंकि अगर वे इसे अपराध कहते तो पुलिस उन्हें परेशान करती. जिसकी वजह से उसकी जान जा रही थी. अब समय पर अपनी जान बचाने के लिए आत्महत्या करने वालों को इलाज मुहैया कराने की जरूरत है.

समस्या पर मात करने के लिए आत्महत्या नहीं तो लड़ना सीखों

अकेले गोंदिया जिले में पिछले छह महीनों में 169 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया. समय पर इलाज मिल जाने के कारण उनकी जान बच गई. जिन लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया और निजी अस्पतालों में उपचार हुआ ऐसे लोगों के आंकड़े सामने नहीं आए. कुछ ने ग्रामीण क्षेत्रों में ही उपचार कराया है. मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या का सहारा लेना सही नहीं है. कठिनाइयों को दूर करने के लिए धैर्य से लड़ने की जरूरत है.

16 लोगों ने की आत्महत्या

अवसाद के कारण आत्महत्या का प्रयास करने वाले 16 लोगों की मृत्यु हो गई. महज छह महीने में 14 पुरुषों और 2 महिलाओं समेत 16 लोगों ने आत्महत्या की है. मनोरोग विशेषज्ञ, जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी डा. चिरवतकर ने बताया कि विभिन्न समस्याओं के कारण व्यक्ति आत्महत्या करने की सोचता है इसे रोकने के लिए सरकार, मीडिया और जनता को मिलकर काम करने की जरूरत है. सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यक्रम शुरू किए हैं. इसमें मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता आदि टीमें शामिल हैं. यह मुफ्त निदान और उपचार प्रदान करता है.