logo_banner
Breaking
  • ⁕ सूखा प्रभावित क्षेत्र का राजस्व मंत्री बावनकुले ने लिया जायजा, कहा - किसानों की मदद में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी ⁕
  • ⁕ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का आंदोलन, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जलाया कुमार का पुतला ⁕
  • ⁕ वडेट्टीवार के करीबी निखिल सुरमवार के घर भाजपा विधायक की ‘गुफ्तगू’; सावली में कांग्रेस के सियासी साम्राज्य पर मंडरा रहा खतरा? ⁕
  • ⁕ नागपुर जिले के 13 सहित विदर्भ के 95 तहसीलों में अकाल घोषित, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जारी किया जीआर ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र का 75 प्रतिशत क्षेत्र अकाल घोषित, महायुति सरकार ने जीआर किया जारी; कर्जवसूली रोक , परीक्षा फीस माफ़ सहित लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय ⁕
  • ⁕ त्योहारों पर नागपुर और न्यू अमरावती के यात्रियों को बड़ी राहत, मध्य रेलवे चलाएगा विशेष ट्रेनें ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Gondia

Gondia: खरीफ की फसल से हुए नुकसान से किसान संकट में, रबी मौसम से उम्मीद


गोंदिया: खेतों में खून-पसीना बहाने और हाड़तोड़ मेहनत करने वाले किसानों को बीते कुछ वर्षों से एक के बाद एक संकट का सामना करना पड़ रहा है. मौसम का मिजाज बदलने से फसलों का नुकसान हो रहा है. इस वर्ष खरीफ की फसलों की कटाई के समय बेमौसम बारिश ने दस्तक देने से फसलों का भारी नुकसान हुआ था. उसके पहले अतिवृष्टि से किसानों को बेजार कर दिया था. इस संकट से जैसे तैसे बाहर निकलकर किसानों ने रबी  सफलों बुआई शुरू की है. संकट में फंसे किसानों को रबी मौसम से काफी उम्मीदें हैं. वर्षभर खेत में मेहनत करने के बाद किसान फसल उत्पादन लेता है. 

फसल की बिक्री के बाद अपने वर्षभर का नियोजन करता है. परिवार की आजीविका व कर्ज का भुगतान करता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक व सुलतानी संकटों से किसान पूर्णतः टूट चुका है. इस बार अतिवृष्टि से खरीफ की धान फसल को काफी नुकसान हुआ था. धान के साथ ही सब्जीभाती व अन्य  फसलों का भी नुकसान हुआ. अब रबी से किसान को उम्मीद है. इस स्थिति में किसान सरकार से सहायता काफी आस लगाए बैठा है. 

पहले प्रकृति के मौसम समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाते थे लेकिन गत कुछ वर्षो से निसर्गचक्र बदल सा गया है. गर्मी, ठंड व बारिश के मौसम में बदलाव देखने मिल रहा है इसका असर खेती पर भी दिखाई दे रहा है. ऐसी स्थिति में मौसम विभाग का  अनुमान भी अनेक बार गलत साबित हो जाता है. ऋतुचक्र बदलने से खेती व्यवसाय भी बड़े पैमाने पर  प्रभावित हो गया है. फसलों पर तरह-तरह की बीमारियों को प्रकोढ बढ़ गया है. इससे किसानों की दिक्कतें बढ़ती जा रही है और किसान संकट में घिर गया है. 

महंगा से बेहाल  

पहले की तुलना में बीज, खाद व कीटकनाशक की कीमतें बढ़ गई है. इन सब के बाद किसानों के नसीब में निराशा ही आती है. इससे जिले का किसान पूरी तरह से निराश हो गया है. प्राकृतिक आपदा के बाद सरकार बड़ी-बड़ी घोषणा करती है. इसके बाद किसानों को नियम व शर्तों के आधार पर अल्प राहत प्रदान करते है. इससे उनका लागत खर्च भी नहीं निकलता.
किसान इसमें से कर्ज चुकाएं, परिवार का पालन पोषण करेगा या फिर आगामी मौसम की तैयारियां करेगा. यह   प्रश्न उसके सामने निर्माण  हो जाते हैं.