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Gondia: अपनी मांगों पर अड़े धन केंद्र संचालक, अब तक नहीं शुरू हुई खरीदी


गोंदिया: धान खरीदी केंद्र संचालकों पर लगाए गए कड़े नियम व शर्तों को लेकर मंत्रालय में बैठक का आयोजन किया गया था. जिसमें बताया गया है कि संस्थाओं के लिए लगाए गए कुछ नए नियमों में शिथिलता बरती जा रही है. इस तरह का आश्वासन खरीदी केंद्र संचालकों को दिया गया. जिले के धान खरीदी केंद्र संचालकों ने निर्णय लिया है कि आश्वासन के बजाए परिपत्रक जारी करो.

परिपत्रक निकालने के बाद ही धान की खरीदी की जाएंगी. इस मांग पर अड़े होने से किसानों का धान खरीदा नहीं जा रहा है. जबकि दीपावली को सिर्फ 3 दिन शेष बचे हैं और ऐसे में किसानों का धान खरीदा नहीं गया तो किसान अल्प दाम में अपना कीमती धान दलालों को बेचने के लिए मजबूर हो जाएंगे. 

उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा शासकीय धान खरीदी केंद्र संचालकों के लिए कड़े नियम व शर्त लागू की गई है. जिसमें प्रमुख शर्त यह रखी गई है कि केंद्र संचालकों को 1 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी व 20 लाख रुपए एफडीआर जमा करने की है. यही एक शर्त है कि केंद्र संचालकों मुसीबत बन गई है. गोदाम किराया व धान की घट में बढ़ोतरी नहीं की गई. नियम व शर्तों के विरोध में जिले के धान खरीदी केंद्र संचालकों ने मंजूरी मिलने के बाद भी खरीदी प्रक्रिया शुरू नहीं की है.  

जिसमें कहा गया है कि 1 करोड़ की बैंक गारंटी में शिथिल करने, एफडीआर की राशि 20 लाख रु. से घटाकर 10 लाख रुपए करने, गोदामों से तत्काल धान उठाने व कमीशन बढ़ाने के संबंध में सकारात्मक चर्चा कर केंद्र संचालकों को आश्वासन दिया गया, लेकिन इस संदर्भ में शासन ने कोई पत्रक निकाला नहीं. जिस कारण जिले के धान खरीदी केंद्र संचालकों ने खरीदी की प्रक्रिया को शुरू नहीं किया है.  

गोदामों में धान संग्रहण शुरू

जानकारी दी गई है कि किसानों ने धान फसल काटकर बोरों में धान भरकर रखा है, खरीदी केंद्र शुरू नहीं होने के कारण खेतों में ही धान के बोरों का ढेर लगा हुआ है. धान खराब होने के डर से अनेक किसानों ने धान खरीदी केंद्रों के गोदामों में धान संग्रहित करना शुरू कर दिया है. केंद्र संचालकों द्वारा जानकारी दी जा रही है कि इंसानियत के तौर पर किसानों का हित देखते हुए धान के बोरे गोदामों में उनके मर्जी से रखे जा रहा हैं. जिसकी जिम्मेदारी स्वयं किसान उठा रहे हैं.