गोंदिया में जंगली हाथियों का तांडव: 50 हेक्टेयर से अधिक मक्का की फसल बर्बाद, दहशत में किसान
गोंदिया: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक महीने से अर्जुनी मोरगांव तालुका में हाथियों के झुंड ने भारी तबाही मचाई है। अब तक लगभग 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लगी मक्का, धान और सब्जियों की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। अपनी साल भर की मेहनत को आंखों के सामने उजड़ता देख किसानों में भारी रोष और डर का माहौल है।
रात भर जागकर फसलों की रखवाली कर रहे किसान
हाथियों के डर से किसान अब रात की नींद भूल चुके हैं। अपनी बची-कुची फसलों को बचाने के लिए किसान कड़ाके की ठंड और अंधेरे के बावजूद खेतों में अलाव (शेकोटी) जलाकर रात-रात भर पहरेदारी कर रहे हैं। हालांकि, हाथियों का झुंड इतना आक्रामक है कि किसानों के लिए अपनी जान बचाना भी मुश्किल हो रहा है।
आंध्र प्रदेश से आए हैं ये 'बिन बुलाए मेहमान'
जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह झुंड करीब एक महीने पहले आंध्र प्रदेश से होते हुए गढ़चिरौली और फिर गोंदिया जिले में दाखिल हुआ था। वडेगाव बांध्या क्षेत्र में मक्के की प्रचुर उपलब्धता के कारण हाथियों ने यहीं अपना डेरा डाल लिया है। पिछले तीन वर्षों से यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से कमर टूट गई है।
हमले में 4 किसान घायल, सांसद ने किया दौरा
दो दिन पहले वडेगाव बांध्या में खेतों में काम कर रहे किसानों पर हाथियों ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें 4 किसान मामूली रूप से घायल हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सांसद डॉ. प्रशांत पडोळे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने वन विभाग को तत्काल नुकसान का पंचनामा करने और किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए हैं।
वन परिक्षेत्र अधिकारी मिलिंद पवार ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों से लैस दो टीमों का गठन किया गया है और प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले जंगल या खेत की ओर न जाने की चेतावनी दी है।
वहीं, स्थानीय किसान उमेश चिंचघरे और अन्य ग्रामीणों की मांग है कि इन हाथियों को वापस उन्हीं राज्यों में खदेड़ा जाए जहां से वे आए हैं, ताकि क्षेत्र में जान-माल का और अधिक नुकसान न हो। अब सभी की निगाहें वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे इन हाथियों को कब तक क्षेत्र से बाहर निकाल पाते हैं।
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