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Maharashtra

भंडारे, लंगर और शादी की पंगत के लिए FDA का नया फरमान; आयोजन से 7 दिन पहले लेनी होगी अनुमति, मुंडे ने जारी की स्थायी गाइडलाइन


मुंबई: महाराष्ट्र में अब शादियों की पंगत से लेकर गणेशोत्सव, नवरात्रि, दिवाली, रमजान या ईद के दौरान आयोजित होने वाले महाप्रसाद, लंगर, अन्नछत्र और इफ्तार दावतों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। श्रद्धालुओं और नागरिकों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले और फूड पॉइजनिंग की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगे, इसके लिए अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने देश में पहली बार 'सण-उत्सव अंमलबजावणी मार्गदर्शिका' स्थायी रूप से लागू की है।

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने हर त्योहार पर अलग से आदेश जारी करने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करते हुए एक व्यापक और स्थायी व्यवस्था बनाई है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह कड़ा कदम उठाया गया है।

आयोजन से कम से कम 7 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, राज्य में किसी भी तरह के सामूहिक भोजन, महाप्रसाद, भंडारा या लंगर का आयोजन करने से कम से कम 7 दिन पहले स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Designated Officer) को निर्धारित प्रारूप में पूर्व सूचना देकर अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया, "आयोजकों द्वारा एक सप्ताह पहले सूचना दिए जाने से हमारे खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यक्रम से पहले ही आयोजन स्थल पर जाकर रसोई की जगह, पानी की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों की जमीनी जांच कर सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भोजन की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना और फूड पॉइजनिंग के जोखिम को जड़ से समाप्त करना है।"

त्योहारों का तीन स्तरों में वर्गीकरण
प्रशासन ने त्योहारों की व्यापकता और जोखिम को ध्यान में रखते हुए त्रिस्तरीय निगरानी चक्र तय किया है, जिसके तहत त्योहार शुरू होने के 21 दिन पहले से लेकर समाप्ति के 30 दिन बाद तक विशेष अभियान चलाया जाएगा:

  • स्तर-1 (राज्यव्यापी): गणेशोत्सव, नवरात्रि, दिवाली, ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा, क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या।
  • स्तर-2 (क्षेत्रीय): महाशिवरात्रि, होली, पंढरपुर वारी, श्रावण मास, दहीहंडी, दशहरा और कोजागिरी पूर्णिमा।
  • स्तर-3 (स्थानीय): ग्रामदेवता यात्रा, मेले, उर्स और पालकी समारोह।

इस दौरान संदिग्ध मिलावटी सामग्री को रोकने के लिए तड़के नाकाबंदी की जाएगी, कोल्ड स्टोरेज व थोक मंडियों की गहन जांच होगी और मौके पर ही त्वरित टेस्टिंग के लिए सड़कों पर 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' यानी चलती-फिरती मोबाइल लैब तैनात रहेंगी।

केटरर्स, राशन और कर्मचारियों के लिए कड़े नियम
सामूहिक भोजन तैयार करने वाले ठेकेदारों और मंडलों के लिए भी जवाबदेही तय की गई है:

  • लाइसेंस अनिवार्य: भोजन बनाने वाला केटरर या ठेकेदार एफडीए से अधिकृत और लाइसेंसधारक होना चाहिए।
  • कच्चे माल का पक्का बिल: खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल, घी, मावा (खोया), मसाले और दालों की खरीद का पक्का बिल और उनका स्रोत जांच अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
  • मेडिकल फिटनेस: भोजन पकाने वाले रसोइयों और खाना परोसने वाले हर कर्मचारी के पास वार्षिक मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट (तंदुरुस्ती प्रमाण पत्र) होना आवश्यक रहेगा।
  • त्योहारी सीजन में ग्राहकों के लिए एफडीए की एडवाइजरी
  • मिठाई खरीदारी: दुकानों के मुख्य काउंटर पर ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप का क्यूआर कोड और वैध लाइसेंस नंबर जरूर देखें। चांदी के वर्क वाली मिठाइयों में शुद्ध चांदी की ही पुष्टि करें।
  • कागज व स्याही से बचाव: किसी भी खाद्य पदार्थ को अखबार या छपे हुए स्याही वाले कागज में पैक न करवाएं, स्याही पेट के लिए जहरीली हो सकती है।
  • उपवास का सामान: व्रत में इस्तेमाल होने वाले भगर (वरई), साबूदाना और राजगिरा खरीदते समय पैकेट पर निर्माण व एक्सपायरी तारीख की जांच करें।
  • जले हुए तेल से परहेज: बार-बार उबाले गए या काले पड़ चुके तेल में तले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • पक्का बिल लें: मिठाई या खाद्य सामग्री खरीदते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल मांगें, ताकि मिलावट पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।