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Maharashtra

महायुति में अंदरूनी घमासान पर सीएम सख्त; वर्षा बंगले पर हुई समन्वय बैठक, 70-30 फंड और निगम बंटवारे के फॉर्मूले पर लगी मुहर


नागपुर: महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (Mahayuti Alliance) के घटक दलों के बीच पिछले कुछ समय से जारी बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और खींचतान को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री के शासकीय आवास ‘वर्षा’ पर सोमवार देर रात एक अहम समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde), उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) सहित महायुति के प्रमुख नेता उपस्थित रहे।

बैठक के बाद मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे (Chandrashekhar Bawankule) ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने सहयोगी दलों के नेताओं को कड़े शब्दों में हिदायत दी है कि वे एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर टीका-टिप्पणी करने या विसंगत भूमिका पेश करने से पूरी तरह परहेज करें। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि गठबंधन की सामूहिक भूमिका ही जनता के सामने जानी चाहिए, न कि नेताओं के व्यक्तिगत मतभेद।

सार्वजनिक बयानबाजी पर पाबंदी और 12 घटक दलों में समन्वय
हाल के दिनों में घटक दलों के नेताओं द्वारा अलग-अलग मुद्दों पर परस्पर विरोधी बयान दिए गए थे, जिससे विपक्ष को महायुति में दरार होने का दावा करने का मौका मिल रहा था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि किसी एक नेता के स्वतंत्र बयान से अनावश्यक विवाद खड़ा होता है और जनता में गलत संदेश जाता है। इसलिए किसी भी विधायक या सांसद को अपने सहयोगी दल या नेताओं पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की इजाजत नहीं होगी।

2024 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में हुई यह पहली बड़ी समन्वय बैठक थी। इसमें चंद्रशेखर बावनकुळे, छगन भुजबळ, गिरीश महाजन, दादा भुसे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई, हसन मुश्रीफ और संजय खोडके सहित प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक में मुख्य तीन दलों (भाजपा, शिवसेना, राकांपा) के अलावा गठबंधन के सभी 12 घटक दलों के बीच समन्वय मजबूत करने पर सहमति बनी।


जिला विकास निधि के लिए '70-30' फॉर्मूला तय
स्थानीय स्तर पर विधायकों और मंत्रियों के बीच विकास निधि को लेकर होने वाले टकराव को रोकने के लिए बैठक में एक स्पष्ट वितरण ढांचा निर्धारित किया गया:

  • 70 प्रतिशत निधि: जिले के विधायकों के माध्यम से विकास कार्यों के लिए खर्च की जाएगी।
  • 30 प्रतिशत निधि: संबंधित जिले के पालक मंत्री समन्वय के आधार पर वितरित करेंगे।
  • विवाद निवारण प्रणाली: यदि किसी जिले में निधि आवंटन को लेकर मतभेद होते हैं, तो सबसे पहले विभागीय आयुक्त के स्तर पर समाधान निकाला जाएगा। वहां बात न बनने पर मामला समन्वय समिति और फिर मुख्यमंत्री व दोनों उपमुख्यमंत्रियों के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा।

महामंडलों (निगमों) के बंटवारे का 48-29-23 फॉर्मूला

बैठक में लंबे समय से लंबित विभिन्न सरकारी बोर्ड और महामंडलों के पदों के बंटवारे पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। सूत्रों के मुताबिक, निगमों के संभावित आवंटन के लिए एक प्रारंभिक फॉर्मूला तैयार किया गया है:

  • भाजपा: 48 प्रतिशत हिस्सेदारी
  • शिवसेना: 29 प्रतिशत हिस्सेदारी
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP): 23 प्रतिशत हिस्सेदारी

इसी के साथ किसे कौन-सा महामंडल मिलेगा, इस पर अगले 15 दिनों के भीतर एक-दो अतिरिक्त बैठकों के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

आगामी चुनावों और सरकारी योजनाओं के लिए संयुक्त रणनीति
बैठक का मुख्य जोर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और जन-कल्याणकारी योजनाओं पर रहा। नेताओं ने संकल्प लिया कि जिस तरह 2024 के विधानसभा चुनाव में सभी दलों ने एकजुट होकर काम किया था, उसी तरह आने वाले चुनावों में भी पूर्ण समन्वय रखा जाएगा। इसके साथ ही सभी घटक दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया कि वे राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी और उनका सीधा लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े नागरिक तक पहुंचाने के लिए धरातल पर मिलकर काम करें।