'अमित ठाकरे पर २ घंटे में एक्शन, तो उपमुख्यमंत्री के हादसे पर FIR क्यों नहीं?'; सुप्रिया सुले का सरकार पर तीखा हमला, एनसीपी नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल
पुणे/मुंबई: "एक कॉलेज से सिर्फ फोटो हटाने पर अमित ठाकरे के खिलाफ महज दो घंटे में एफआईआर (FIR) दर्ज हो जाती है। वहीं दूसरी तरफ, सत्ता में बैठे राज्य के उपमुख्यमंत्री का इतना भीषण विमान हादसा हो जाता है और उनकी जान चली जाती है, फिर भी सरकार एक साधारण मामला तक दर्ज नहीं करती। यह कैसा न्याय है?" यह तीखा सवाल राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी की नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने उठाया है। ठाणे दौरे के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दिवंगत नेता अजित पवार के हादसे की जांच, बढ़ती महंगाई, पार्टी के चुनाव चिह्न के मामले और ठाणे के स्थानीय मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा।
'भाई हमारा गया, और सत्ता का सुख ये भोग रहे हैं'
दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे का जिक्र करते हुए सुप्रिया सुले भावुक और आक्रमक नजर आईं। उन्होंने कहा, "हमने अपने घर का कर्ताधर्ता खोया है। एक मौजूदा उपमुख्यमंत्री का इतना बड़ा हादसा हो गया, लेकिन सरकार ने एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की? जांच की असल स्थिति क्या है, यह भी किसी को नहीं पता।"
सत्ता में शामिल एनसीपी विधायकों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "अजित पवार की पार्टी सरकार में साझीदार है। उनके ४० विधायक और मंत्री सत्ता का सुख भोग रहे हैं। लेकिन उनमें से एक भी विधायक या मंत्री ने मेरे भाई की मौत की जांच या एफआईआर दर्ज कराने के लिए आज तक एक शब्द नहीं बोला। भाई हमारा गया और सत्ता ये भोग रहे हैं।"
सुप्रीम कोर्ट में सिनेमा की तरह ‘तारीख पे तारीख’
पार्टी और चुनाव चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा, "हमारा न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। लेकिन फिल्मों में जो 'तारीख पे तारीख' हम देखते थे, वही आज हमारे साथ हो रहा है। हम छह बार अदालत जा चुके हैं, फिर भी हमारा केस बोर्ड पर नहीं लग रहा। एक ही मामले में एक के लिए एक न्याय और दूसरे के लिए अलग न्याय क्यों?"
ठाणे में प्रस्तावित डेटा सेंटर का विरोध
ठाणे के स्थानीय मुद्दों पर नागरिकों का पक्ष लेते हुए उन्होंने साफ किया, "ठाणे में प्रस्तावित अमेज़न डेटा सेंटर का स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं। जितेंद्र आव्हाड के नेतृत्व में पार्टी ने जनता के साथ खड़े रहने का फैसला किया है। अगर ठाणे की जनता इसे नहीं चाहती, तो हम यह डेटा सेंटर यहां नहीं बनने देंगे।"
सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "सरकार को सिर्फ हजारों करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट्स में दिलचस्पी है। सड़कों के गड्ढे, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं। ठाणे में महंगी मेट्रो के बजाय अगर मजबूत बस कनेक्टिविटी दी जाती, तो आम जनता का काम ५०० रुपये में हो जाता।"
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