अजित पवार दुर्घटना मामला: 'फडणवीस सरकार कुछ छिपा रही है', नाना पटोले ने सुप्रिया सुले का समर्थन करते लगाए गंभीर आरोप
नागपुर: दिवंगत नेता अजित पवार के संदिग्ध/दुर्घटनाग्रस्त निधन को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मामले में अब तक पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज न किए जाने पर सांसद सुप्रिया सुले द्वारा उठाए गए सवालों को कांग्रेस का भी खुला समर्थन मिल गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार इस मामले में कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है।
पटोले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अजित पवार के निधन के मामले में सुप्रिया सुले द्वारा उठाया गया रुख बिल्कुल सही और जायज है। उन्होंने सत्ता में भागीदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 40 विधायकों और मंत्रियों की चुप्पी पर भी गहरा संदेह जताया।
एनसीपी के 40 विधायकों के मौन पर उठाए सवाल
नाना पटोले ने कहा, "सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी फिलहाल सत्ता में शामिल है, लेकिन उनके किसी भी विधायक या मंत्री ने अब तक इस मामले में केस दर्ज करने की मांग नहीं की है। अजितदादा के निधन पर उनके अपने ही विधायकों का एक साधारण एफआईआर तक की मांग न करना कई गंभीर संदेह पैदा करता है। आखिर इस पूरे मामले के पीछे क्या रहस्य छिपा है, यह सामने आना चाहिए।"
सुप्रिया सुले ने भी जताई थी नाराजगी
इससे पहले सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरते हुए कहा था, "मेरा भाई चला गया, राज्य के एक मौजूदा उपमुख्यमंत्री के साथ इतना भीषण हादसा हुआ; फिर भी सरकार ने अब तक मामला दर्ज क्यों नहीं किया? सत्ता में शामिल उनके 40 विधायकों और 9 मंत्रियों ने जांच और एफआईआर को लेकर एक शब्द तक क्यों नहीं बोला?" इस मामले में विधायक रोहित पवार भी लगातार एफआईआर दर्ज करने की मांग उठा रहे हैं।
7.8% जीडीपी के दावों पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नाना पटोले ने देश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी वृद्धि के दावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "यदि देश की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो देश में महंगाई और बेरोजगारी लगातार क्यों बढ़ रही है? अर्थव्यवस्था मजबूत होने के दावों के बीच किसान आत्महत्या करने को क्यों मजबूर हैं? उन्होंने आगे कहा, "जनता के सामने सिर्फ कागजी और झूठे आंकड़े पेश करके असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।"
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