'शिवाजी कौन होता?' पुस्तक पर छिड़ा संग्राम: मुख्यमंत्री फडणवीस ने विवाद को बताया निरर्थक, विधायक संजय गायकवाड़ पर कसा तंज
सोलापुर: वामपंथी नेता दिवंगत गोविंद पानसरे की प्रसिद्ध पुस्तक 'शिवाजी कौन होता?' (शिवाजी कौन थे?) को लेकर महाराष्ट्र में जारी विवाद पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाया है। सोलापुर दौरे पर पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों पुरानी किताब पर आज विवाद पैदा करना "असामाजिक और संवेदनहीन" कृत्य है।
क्या है पूरा विवाद?
बुलढाणा से शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने इस पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए 'एकेरी' (एकवचन) संबोधन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। गायकवाड़ ने प्रकाशक प्रशांत आंबी को फोन पर कथित तौर पर भद्दी गालियां दीं और धमकी दी थी। इसके जवाब में आज प्रकाशक प्रशांत आंबी ने वामपंथी कार्यकर्ताओं के साथ बुलढाणा में विधायक के घर की ओर मार्च निकाला और बीच सड़क पर पुस्तक का वाचन किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
"मुद्दा पकड़कर चर्चा में रहने की कोशिश"
विधायक संजय गायकवाड़ और आंदोलनकारियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान इतना बड़ा है कि कोई उनका अपमान नहीं कर सकता। यह पुस्तक 1979 में लिखी गई थी। अब इतने वर्षों बाद इस मुद्दे को उखाड़ना और दोनों पक्षों का आपस में भिड़ना गलत है। मुझे नहीं पता कि आपत्ति जताने वाले (संजय गायकवाड़) ने किताब पढ़ी भी है या नहीं, और प्रदर्शन करने वालों को भी पता है या नहीं कि वे सड़क पर क्यों हैं। महज चर्चा में बने रहने के लिए विवाद खड़ा करना ठीक नहीं है।"
सेल्फ रेडिकलाइजेशन' का शिकार है आरोपी
मुख्यमंत्री ने मुंबई में धर्म पूछकर चाकू से हमला करने वाले युवक की घटना पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने इसे 'स्व-कट्टरतावाद' (Self-Radicalization) का मामला बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इंटरनेट और कुछ साहित्यों के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपी इसी विचारधारा की चपेट में आकर 'जिहाद' के नाम पर अन्य धर्म के लोगों को निशाना बना रहा था।
उन्होंने आगे कहा, "आरोपी का परिवार अमेरिका में रहता है और वह खुद भी कई सालों तक विदेश में रहा है। भारत लौटने के बाद वह कुर्ला और नवानगर में रहा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब एटीएस (ATS) और एनआईए (NIA) इस बात की जांच कर रही हैं कि इस कट्टरता के पीछे और कौन लोग शामिल हैं या क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है।
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