Nashik TCS Corporate JIhad Case: फरार निदा खान का आरोपियों से सक्रिय संपर्क, दानिश के 'फेस लॉक' ने खोले कई गहरे राज
नाशिक: नाशिक स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी TCS में हुए कथित धर्मांतरण मामले की जांच में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा किए गए तकनीकी विश्लेषण में यह सामने आया है कि मामले की मुख्य संशयित और फिलहाल फरार आरोपी निदा खान, जेल में बंद अन्य आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में थी।
फरार निदा खान के सक्रिय संपर्क से पुलिस हैरान
पुलिस जांच में पता चला है कि निदा खान ने कंपनी से नौकरी छोड़ने के बाद भी अन्य आरोपियों के साथ अपने संबंध खत्म नहीं किए थे। मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि वह और अन्य आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह केवल धर्मांतरण का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे धोखाधड़ी की कोई बड़ी साजिश रची गई है।
दानिश शेख का मोबाइल अनलॉक, हाथ लगे अहम सबूत
इस मामले के दूसरे आरोपी दानिश शेख के मोबाइल ने जांच की दिशा बदल दी है। दानिश तकनीकी रूप से काफी शातिर है; उसने अपने मोबाइल के हर ऐप और फाइल पर अलग-अलग पासवर्ड और 'फेस आईडी' (Face ID) सुरक्षा लगा रखी थी। इस वजह से फॉरेंसिक लैब (FSL) को डेटा एक्सेस करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
SIT प्रमुख और सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके ने इस तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए कोर्ट से विशेष अनुमति ली। इसके बाद शुक्रवार (24 अप्रैल) को दानिश को दिंडोरी रोड स्थित फॉरेंसिक लैब ले जाया गया। कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके 'फेस आईडी' का उपयोग कर मोबाइल को सफलतापूर्वक अनलॉक किया गया। मोबाइल से कई संदिग्ध फोटो, वीडियो और चैट्स बरामद हुए हैं, जिनका अब बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है।
27 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी नजरें
जैसे-जैसे डिजिटल सबूत पुख्ता हो रहे हैं, सबकी निगाहें 27 अप्रैल को होने वाली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। इस दिन फरार निदा खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी है। पुलिस अदालत में अब तक जुटाए गए ठोस तकनीकी और डिजिटल सबूत पेश कर सकती है। यह देखना अहम होगा कि क्या निदा खान को राहत मिलती है या पुलिस की गिरफ्त और मजबूत होती है।
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