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Maharashtra

स्टेमी महाराष्ट्र प्रकल्प ने बचाईं हजारों जानें, 1.49 लाख गंभीर रोगियों को तत्काल उपचार


मुंबई: दिल का दौरा आने पर मिलने वाला पहला एक घंटा यानी 'गोल्डन ऑवर' अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी अवधि में मरीज को सटीक निदान और त्वरित उपचार मिलना चाहिए। इस उद्देश्य से सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा 'स्टेमी महाराष्ट्र' प्रोजेक्ट राज्य भर में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत अब तक 43.4 लाख से अधिक नागरिकों की ECG जांच, 28,000 से अधिक STEMI (गंभीर दिल का दौरा) रोगियों की समय पर पहचान और 1,49,000 से अधिक गंभीर रोगियों को तत्काल उपचार प्रदान किए गए हैं।

राज्य की 2,415 स्पोक स्वास्थ्य इकाइयों और 98 हब अस्पतालों के सक्षम नेटवर्क के कारण दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के रोगियों को भी अत्याधुनिक हृदय रोग उपचार प्रणाली का लाभ मिल रहा है। स्पोक केंद्रों में मरीज की निःशुल्क ECG जांच कर उसे क्लाउड तकनीक के जरिए विशेषज्ञों को भेजा जाता है। केवल 10 मिनट के भीतर निदान पूरा हो जाने से मरीज को गोल्डन ऑवर में ही आवश्यक उपचार शुरू करना संभव हो पाता है।

स्टेमी प्रोजेक्ट के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ग्रामीण अस्पताल, उपजिला अस्पताल, जिला अस्पताल तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्राथमिक उपचार देने के बाद जरूरत के अनुसार रोगियों को 98 हब अस्पतालों में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और अन्य उन्नत हृदय रोग उपचारों के लिए तत्काल रेफर किया जाता है। महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को ये उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से हृदय रोग के प्रारंभिक लक्षणों के प्रति सतर्क रहने का भी आग्रह किया है। छाती में दबाव या तीव्र दर्द, चक्कर या बेहोशी, जबड़ा, गर्दन, बाएँ कंधे या हाथ की ओर फैलने वाला दर्द, अचानक पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना तथा मतली या उबकाई—ये हृदयाघात के खतरनाक लक्षण हो सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण का अनुभव होने पर बिना देर किए 108 एम्बुलेंस सेवा से संपर्क करके नज़दीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाएँ, ऐसा आग्रह किया गया है।

"समय पर निदान = जीवन की रक्षा" के सिद्धांत को मूर्त रूप देते हुए स्टेमी महाराष्ट्र प्रोजेक्ट राज्य में हृदय रोग उपचार व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। अत्याधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी और सक्षम रेफरल सिस्टम के माध्यम से हजारों नागरिकों को समय पर उपचार मिलवाने में यह सफल रहा है।

हृदयाघात के प्रमुख कारण

  • उच्च रक्तचाप और मधुमेह
  • आनुवंशिकता
  • असंतुलित आहार
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी
  • तंबाकू का सेवन, मद्यपान जैसे नशे
  • दैनिक जीवनशैली
  • मानसिक तनाव

स्टेमी क्या है? 

STEMI यानी ST-ऊपर उठने वाला मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन, हृदयाघात का एक सामान्य प्रकार है। इसमें हृदय के किसी हिस्से को रक्त का प्रवाह रुक जाने के कारण ऑक्सीजन की कमी से हृदय की मांसपेशियों को क्षति होती है और परिणामस्वरूप दिल का दौरा पड़ता है।

हृदयाघात से बचाव

स्टेमी महाराष्ट्र कार्यक्रम में शामिल स्पोक स्वरूप सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक ECG उपकरण की मदद से हृदय रोग के लक्षण दिखने वाले मरीज का ECG लिया जाता है और क्लाउड पर अपलोड किया जाता है। उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग कर हृदय रोग विशेषज्ञ कुछ मिनटों में ECG का विश्लेषण करके निदान करते हैं। इसके लिए बेंगलुरु स्थित TriCog Health संस्था के साथ समझौता किया गया है। यह विश्लेषण रिपोर्ट इंटरनेट की मदद से कुछ ही मिनटों में संबंधित अस्पताल को भेज दी जाती है। यदि STEMI का निदान होता है और स्पोक अस्पताल पर उपलब्ध सुविधाएँ मौजूद हैं, तो मरीज को तुरंत थ्रोम्बोलाइसिस उपचार देकर आगे के उपचार के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए नज़दीकी हब संस्थान को भेजा जाता है। इसके लिए हब और स्पोक संस्थाओं के बीच समन्वय करके मरीज को समय पर इलाज दिलाने की योजना बनाई जाती है।