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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव पुराने आरक्षण के आधार पर कराने का दिया आदेश, कोर्ट ने कहा - चार हफ्ते में चुनाव की अधिसूचना करें जारी


नई दिल्ली: महाराष्ट्र में लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय चुनाव में और देरी होने की संभावना है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओबीसी आरक्षण मुद्दे पर अगली सुनवाई 6 मई तक टाल दी है। जस्टिस सूर्यकांत और एनके सिन्हा की खंडपीठ ने सुबह के सत्र के दौरान मामले की संक्षिप्त सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार ओबीसी के लिए 27% राजनीतिक आरक्षण दे दिया है।

महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पुष्टि की कि ओबीसी आरक्षण का मुद्दा हल हो गया है और 27% कोटा बनाए रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने अदालत से एसईसी को बिना देरी के पिछले वार्ड ढांचे के तहत चुनाव कराने का निर्देश देने का आग्रह किया।

लंबित मामला स्थानीय निकाय चुनावों में 27% ओबीसी आरक्षण देने के लिए महा विकास अघाड़ी सरकार के 2021 अध्यादेश के इर्द-गिर्द घूमता है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर, 2021 को आरक्षण को उचित ठहराने के लिए आवश्यक अनिवार्य ‘ट्रिपल-टेस्ट’ प्रक्रिया का पालन न करने का हवाला देते हुए अध्यादेश पर रोक लगा दी थी।

मेहता ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले न्यायालय के आदेश के बाद से पर्याप्त कानूनी संशोधन किए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि संशोधित कानूनी ढांचे के तहत नई कार्यवाही आवश्यक थी। सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि कौन सी याचिकाएँ विशेष रूप से ओबीसी आरक्षण को चुनौती देती हैं। कोर्ट ने कहा कि इस बारे में स्पष्टता की कमी है। लंबी कानूनी लड़ाई के कारण नागपुर, मुंबई, पुणे, ठाणे और नासिक सहित कई प्रमुख नागरिक निकाय 2022 से राज्य द्वारा नियुक्त अधिकारियों के अधीन हैं। 

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