logo_banner
Breaking
  • ⁕ नाना पटोले की भाजपा में होगी वापसी! विधायक परिणय फुके ने किया बड़ा दावा; चर्चाओं का बजार हुआ गर्म ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ त्योहारों पर नागपुर और न्यू अमरावती के यात्रियों को बड़ी राहत, मध्य रेलवे चलाएगा विशेष ट्रेनें ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Nagpur

नागपुर में बने विस्फोटकों से जमींदोज हुआ ट्विन टावर, आईएससी में हुआ खुलासा


नागपुर: नोएडा में 130 मीटर ऊंचे 32 और 29 मंजिला ट्विन टावरों को गिराने का देश का पहला प्रयास अगस्त में किया गया था। मीडिया ने जब इस घटना का सीधा प्रसारण दिखाया तो देश के सभी नागरिकों ने इस रोमांच को महसूस किया। लेकिन इस इमारत को गिराने में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटक नागपुर से मंगवाए गए थे, इस रहस्य का खुलासा इंडियन साइंस कांग्रेस में हुआ था. इस इमारत को गिराने में 3700 किलो से ज्यादा विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था।

लंबी अदालती लड़ाई के बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में जुड़वां टावरों को ध्वस्त कर दिया गया था। यहां एपेक्स 32 मंजिला इमारत थी और सायन 29 मंजिला इमारत थी। इस बिल्डिंग में कुल 850 फ्लैट थे। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की (सीबीआरआई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार इमारत को गिराया गया था। 

अमरावती मार्ग स्थित राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अवसर पर सीबीआरआई के स्टॉल लगाए गए हैं और एक बहुमंजिला इमारत को गिराने का मॉडल ध्यान आकर्षित कर रहा है। स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग डेटा साइंस रिसर्चर डॉ. सुमनकुमार और डॉ. नवीन निशान ने बताया कि इमारत को गिराने के लिए नागपुर की एक विस्फोटक निर्माण कंपनी से विस्फोटक मंगवाए गए थे। लेकिन उसने कंपनी का नाम गोपनीय रखा। दोनों ने समझाया कि यह सुरक्षा कारणों से था।

भारत में 103 मीटर ऊंची बहुमंजिला इमारत को कुछ ही मिनटों में विस्फोटकों से ध्वस्त करने का यह पहला प्रयास था। इस मौके पर आज यह बात सामने आई कि देश में हुए इस पहले प्रयोग में उप राजधानी का भी योगदान काफी शानदार है. उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी कुछ और परियोजनाएं सीबीआरआई के पास आई हैं।

इस इमारत को गिराने के दौरान पैदा हुए कंपन से 2500 मीटर के इलाके की इमारतों को खतरा था। लेकिन साइड बिल्डिंग का संरचनात्मक विश्लेषण किया गया था। इलाके में इमारतें गिरने की स्थिति में हैं या नहीं, इसकी पूरी जानकारी ली गई। कंपन की तीव्रता का अनुमान लगाया गया। शोधकर्ता ने कहा कि उसके बाद ही इमारत को गिराया गया।