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ख़ुफ़िया एजेंसी की रिपोर्ट नहीं देना सही, मुंबई दोहरे बम ब्लास्ट के दोषी की याचिका पर अदालत का आदेश; नागपुर जेल में है बंद 


नागपुर: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुंबई में हुए दोहरे बम ब्लास्ट मामले में मौत की सजा काट रहे दोषी एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी ने उस याचिका को ख़ारिज का दिया है। जिसमें उसने आरटीआई के माध्यम से एजेंसियों और डोजियर की जानकारी मांगी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि, “खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और डोजियर को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। ऐसा करने का अधिकार पुलिस एटीएस के पास नहीं है।”

शुक्रवार को याचिका पर निर्णय देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा सिंह ने कहा, "खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और डोजियर जांच का हिस्सा होते हैं। उन्हें आरटीआई के माध्यम से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। खासकर तब जब बात देश की अखंडता और संप्रभुता पर खतरा होने को लेकर होता है।" 

सिंह ने कहा, "कोई भी आतंकवादी घटना देश की अखंडता को प्रभावित करती है। बल्कि, नागरिकों की सुरक्षा सहित देश की सुरक्षा से भी समझौता कराती है।" उन्होंने कहा, "आटीआई आवेदन के अनुसार अगर खुलासा नहीं किया गया है। तो यह बिलकुल देश हित में हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, राज्य आतंकवाद विरोधी दस्ते आरटीआई एक्ट की धारा 24 से बाहर होते हैं। 

आरोपी काट रहा नागपुर जेल में सजा 

एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी 2006 में मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट का मुख्य आरोपी है। अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई है। हालांकि, आरोपी ने सजा के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। जिसके कारण वह अभी नागपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है।