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Nagpur

बाल्य बोरकर के आरोपों को मनपा प्रशासन ने किया ख़ारिज, कहा- नियमों के तहत हुई कार्रवाई


नागपुर:  महानगर पालिका द्वारा बस सेवा के परिचालन के लिए इंट्रीग्रेटेड बस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट की कंपनी की नियुक्ति के लिए एक टेंडर निकाला है। इस पर मनपा की  ही परिवहन समिति के पूर्व सभापति नरेंद्र बोरकर ने सवाल उठाये है। पूर्व सभापति के मुताबिक महानगरपालिका को कंपनी को यह जिम्मेदारी देने के बजाये खुद बस सेवा के परिचालन की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। हालाँकि टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठाये गए सवालों और सदेहों को मनपा प्रशासन और परिवहन विभाग ने ख़ारिज किया है।

नागपुर महानगर पालिका की आपली बस सेवा का संचालन इंट्रीग्रेटेड बस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट के माध्यम से होता है. इसके लिए मौजूदा समय में दिल्ली सरकार की कंपनी दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड कंपनी के जिम्मे है. डीम्ड का नागपुर महानगर पालिका के साथ किया गया क़रार 2022 में ख़त्म हो चुका है. जिस वजह से नए सिरे से कंपनी की नियुक्ति के लिए टेंडर निकाला गया है. लेकिन इस प्रक्रिया पर परिवहन समिति की जिम्मेदारी संभाल चुके नरेंद्र बोरकर पर सवाल उठाये गई।

बोरकर के आरोप कई तरह के है: 

  • टेंडर प्रक्रिया को नियम के साथ जारी न किया जाना 
  • टेंडर में भाग लेने वाली कंपनी के अनुभव पर भी सवाल उठाया गया है 
  • बोरकर के मुताबिक मनपा के अधिकारी टेंडर में भाग लेने वाली कंपनी को समर्थन कर रही है 

मनपा ने आरोपों को किया ख़ारिज:

बोरकर के आरोप महानगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारियों पर है. उनकी दलील है की मनपा किसी कंपनी की नियुक्ति करने के बजाये खुद बसों के संचालन का जिम्मा संभाले। बोरकर की इस दलील के बाद यह भी खास है की इस काम के लिए डीम्ड की नियुक्ति बोरकर के सभापति रहते ही हुई है. परिवहन समिति के उपायुक्त सुरेश बगड़े ने बोरकर द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को ख़ारिज किया है और नियमों के साथ सारी प्रक्रिया होने की बात कही है.

पहले टेंडर और फिर बाद में रिकॉल किये गए टेंडर में सिर्फ दो कंपनियों ने भाग लिया। पहली कंपनी आई ट्रायंगल और दूसरी कंपनी चलो एप है. टेंडर के दोनों चरणों में चलो एप मनपा द्वारा निर्धारित किये गए मूल्यांकन में शीर्ष पर रही. टेंडर की प्रक्रिया होने बाद अब फाइनेंशियल बीड खोलने की तैयारी में मनपा है. जिसका निर्णय अतिरिक्त आयुक्त आंचल गोयल की अध्यक्षता में बातचीत निविदा कमेटी में इसका निर्णय लिया जायेगा। नागपुर महानगर पालिका के मुताबिक वह आने वाले समय में न सिर्फ मनपा की आय बढ़ाने चाहती है बल्कि सारे सिस्टम को ट्रांसपेरेंट करना चाहती है.

चलो एप नामक कंपनी जो इस टेंडर को जीतती हुई दिखाई दे रही है. वह नागपुर महानगरपालिका पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टिकटिंग के काम में अब भी जुड़ी हुई है. मनपा प्रशासन उस आरोप को ख़ारिज कर रही है जिसमे कहा जा रहा है कि, टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के पास ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट का अनुभव नहीं है। मनपा के मुताबिक टेंडर की सभी शर्तें ऑनलाईन उपलब्ध है। टेंडर भरने के लिए कंपनियां स्वतंत्रत थी बावजूद इसके इसे सिर्फ इन्हीं दोनों कंपनियों ने भरा। पहले के मुकाबले नई टेंडर प्रक्रिया में नियमो को कड़ा किया गया है।

इसी के सात परिवहन उपयुक्त ने जो नई शर्ते रखी गयी है उससे घाटे में चल रहे परिवहन विभाग को बेहतर स्थिति में लाया जा सकता है। नई प्रक्रिया में इंट्रीग्रेटेड बस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट और टिकिट कलेक्शन की प्रक्रिया को मिला दिया गया है। मनपा का दावा है की इससे आपली बस सेवा में जारी भ्रस्टाचार को ख़त्म किया जायेगा। करार के मुताबिक अगर बस सड़क पर नहीं चलेगी तो मनपा जुर्माना वसूल करेगी। नियुक्त कंपनी को तय निविदा की 60 फीसदी राशि फिक्स  और बची 40 फीसदी राशि परफॉर्मेंस के आधार पर दी जायेगी के आरोपों को भी ख़ारिज किया है।

परिवहन विभाग ने उस आरोप को भी ख़ारिज किया है जिससे डीम्ड कंपनी के 6 वर्ष के लिए तय की गयी राशि से अधिक राशि नयी कंपनी दी जाने वाली है. विभाग के मुताबिक डीम्ड कंपनी को 6 वर्ष के लिए 172 करोड़ रूपए तय किये गए थे लेकिन फ़िलहाल उसे बिलिंग के हिसाब से पेमेंट दिया जाता है. इसमें टिकट कलेक्शन का हिस्सा शामिल नहीं था. नए करार में यह दोनों एक में ही समाहित है.