सूरत पैटर्न की तर्ज पर होगा शहर का ट्रैफिक संचालन, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन जल्द शुरू करेगा स्टडी
नागपुर: उपराजधानी की ट्रैफिक समस्या लगातार नासूर बनती जा रही है। पुलिस विभाग सहित जिला प्रशासन सहित मनपा द्वारा तमाम कोशिशों के बावजूद समस्या का कोई निवारण नहीं हो पाया है। बल्कि यह और जटिल होती जा रही है। शहर की प्रमुख समस्या का इलाज ढूढ़ने के लिए अब सूरत पैटर्न का सहारा लिया जाएगा। जिसके तहत ट्रैफिक विभाग सहित जिला प्रशासन जल्द ही सूरत का दौरा करेगी और उसे नागपुर शहर में किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा इसकी स्टडी करेगी। इस बात की घोषणा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को दी।
जिले में होने वाले दुर्घटनाओं और उसके लिए किये जारहे उपायों की समीक्षा के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को बैठक बुलाई थी। रवि भवन में आयोजित इस बैठक में जिलाधिकारी डॉ बिपिन इटनकर, पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र सिंघल, मनपा आयुक्त डॉ.अभिजीत चौधरी, अतिरिक्त उपयुक्त अंचल गोयल सहित बड़ी संख्या में अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने शहर सहित जिले के ब्लॅकस्पोट को चिन्हित करने सहित उसे ठीक करने को लेकर शुरू कामों पर संतोष जताया। इसी के साथ उन्होंने सड़क पर अतिक्रमण करने, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करने और ऐसा नहीं करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिए।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "शहर की बढ़ती समस्या बेहद गंभीर है। रॉन्ग साइड से गाड़ी चलाना, नियमो का पालन करना जनता ने अपनी आदत बना लिया है। जब तक कनून का डर और लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी। तब तक सड़क सुरक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए हम बड़े उपाय कर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "सूरत एक ऐसा शहर है जहां का ट्रैफिक व्यवस्था को वहां मौजूद एनजीओ संभालती है। पैटर्न का अध्ययन के लिए प्रशासन की एक टीम वहां जाएगी। इसके बाद आम जनता की मदद से क्षेत्र दर क्षेत्र में लागू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि, "जब तक शासन को आम जनता का सहयोग नहीं मिलेगा तब तक इसे पूरा नहीं किया का सकता है।"
हर साल 800 से 1000 लोगों की मृत्यु
गडकरी ने कहा कि, "नागपुर में हर साल औसतन 800 से 1000 लोगों की मौत होती है। जिसमें 65 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। मृतकों में 18 से 34 उम्र वाले लोग ज्यादा होते है। पिछली बार हमने शहर सहित जिले के अंदर ब्लॅकस्पोट चिन्हित किये थे। जिसे हमने ठीक करे का काम शुरू कर दिया है। इस काम को पूरा करने के बाद हम मरने वालों की संख्या को आधा कर सकेंगे। इसी के साथ स्कुल के सामने मौजूद खतरनाक जोन में हमने स्कुल के सामने क्रासिंग मार्क बनाने का निर्णय लिया है। साथ ही रोड के बीच जो क्रासिंग है, वहां फुटओवर ब्रिज जहां-जहां जरुरत हैं, वहां-वहां एनएचएआई, पीडब्यूडी के माध्यम से बनाएंगे। जिससे लोगों को सुविधा भी हो।"
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