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Nagpur

UCN EXCLUSIVE: डंपिंग यार्ड में नियमों की उड़ी धज्जियां! बिना छिड़काव खोदे जा रहे कचरे के पहाड़, सरेआम बांटी जा रही बीमारियां


- दिव्येश द्विवेदी

नागपुर: नागपुर का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों 'नरक' जैसी दुर्गंध में जीने को मजबूर है। शहर के भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड से उठने वाली ये बदबू अब न केवल घरों के अंदर तक पहुँच गई है, बल्कि नागपुर महानगर पालिका की सभा में भी इसकी गूंज सुनाई दी है। सालों से जमा कचरे के पहाड़ों को हटाने की प्रक्रिया तो शुरू है, लेकिन क्या प्रशासन की लापरवाही नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है? यूसीएन न्यूज़ ने जब डंपिंग यार्ड का जायजा लिया, तो वहां सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। न गैस रोकने के छिड़काव हो रहे हैं, न बेतरतीब ट्रकों पर लगाम है। आखिर इस ज़हरीली हवा का ज़िम्मेदार कौन है? देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट

नागपुर शहर का एक बड़ा भाग इन दिनों शहर के डम्पिंग यार्ड से निकलने वाली दुर्गन्ध से परेशान है. इस परेशानी की गूंज नागपुर महानगर पालिका की सभा में भी सुनाई दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जोर शोर से इस मुद्दे को उठाया और प्रशासन को आड़े हांथो लिया। यूसीएन न्यूज़ ने भी इस समस्या का जायज लिया और क्या कुछ स्थिति है उसका अवलोकन किया। 

शहर के भांडेवाड़ी में नागपुर महानगर पालिका का डम्पिंग यार्ड है. सालो से जमा होने वाले कचरे के बड़े बड़े पहाड़ खड़े हो चुके है. हालाँकि प्रोसेसिंग के माध्यम से इस कचरे को नस्ट करने का प्रयास शुरू है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मुताबिक ये काम शुरू है लेकिन इसमें घोर लापरवाही बरती जा रही है जिस वजह से डम्पिंग यार्ड से निकलने वाली दुर्गन्ध से शहर का एक बड़ा हिस्सा परेशान है.

यूसीएन न्यूज़ ने भी यहाँ जो तस्वीर देखि उसके अनुसार डम्पिंग यार्ड के आस-पास के इलाके में दुर्गन्ध का आतंक है. कचरे को ढ़ोने वाले ट्रक बेतरतीब तरीके से ढुलाई कर रहे है. जिस वजह से डम्पिंग यार्ड का कचरा सडको पर भी गिर रहा है. प्रदुषण का तो हाल ऐसा है की उसे लेकर क्या ही कहा जाये। स्थानीय नागरिको के मुताबिक दुर्गन्ध की वजह से यहाँ साँस लेना भी मुश्किल हो चला है.

निजी कंपनी के माध्यम से वर्षो पुराने कचरे पर प्रोसेसिंग की जा रही है. लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मुताबिक प्रोसेसिंग के दौरान दुर्गन्ध को रोकने और खतरनाक गैसों को हवा में मिलने से रोकने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए वो नहीं अपनाई जा रही है.

यूसीएन न्यूज़ के कैमरों में भी कचरे के पहाड़ को खोदे जाने का जो दृश्य रिकॉर्ड हुआ है. उसमे भी ये साफ तौर से दिखाई दे रहा है की कचरे के पहाड़ को खोदे जाने के समय किसी तरह की द्रव्य का छिड़काव नहीं किया जा रहा है. जैसा यहाँ के जनप्रतिनिधि बता रहे है. जानकारों के मुताबिक इस तरह से सालो पुराने कचरे को निकालने के समय मीथेन,कार्बनडायऑक्साइड,हाइड्रोजन सल्फाइड और मोनोओक्ससाइड जैसी गैस निकलने की संभावना रहती है. जो बेहद ही खतरनाक होती है.

मनपा की सभा में डम्पिंग यार्ड की स्थिति को लेकर जोरदार चर्चा हुई. हालाँकि मनपा ने आने वाले समय में इस समस्या के समाधान के लिए नई एजेंसी को नियुक्त किया है. ये एजेंसी जब काम शुरू करेगी तब करेगी लेकिन जरुरी है की नागरिको से स्वास्थ्य को देखते हुए जरुरी उपाय योजनाए अपनाई जाये। ताकि घनी बस्ती से घिरे इस डम्पिंग यार्ड की दुर्गन्ध नागरिको के लिए खतरनाक न साबित हो सके.