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Bhandara

Bhandara: नागजीरा-नवेगांव टाइगर रिजर्व कार्यालय के बाहर वन मजदूरों का विरोध प्रदर्शन, विभिन्न लंबित मांगों की ओर ध्यान आकर्षित


भंडारा: नागजीरा-नवेगांव टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों ने साकोली में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रशासन का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया। इस विरोध प्रदर्शन में 50 से अधिक वनकर्मियों ने भाग लिया।

महाराष्ट्र राज्य वन रक्षक, वनपाल एवं वन कर्मचारी संघ के केंद्रीय संयोजक ललित उचिबागले ने कहा, "राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश दिया है कि वनकर्मी आठ घंटे से ज़्यादा काम न करें। इसके बावजूद, कर्मचारियों को 24 घंटे कार्यस्थल पर उपस्थित रहना पड़ता है, जो अनुचित है।"

उचिबागले ने कहा कि नागजीरा-नवेगांव टाइगर रिजर्व के निदेशक और उपनिदेशक के साथ बातचीत तो हुई है, लेकिन वास्तव में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों से सिर्फ़ वादे मिलते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं होता।

जानबूझकर तबादलों से उत्पीड़न

वन परिक्षेत्र अधिकारी ए. वी. लांबट ने वनकर्मियों का 30 किलोमीटर तक दूर तबादला कर दिया है। इन तबादलों से कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है। उचिबागले ने कहा कि तबादले वन रक्षकों और वनपालों की सलाह पर ही होने चाहिए थे, क्योंकि कर्मचारियों के काम की प्रकृति की वास्तविक जानकारी सिर्फ़ उन्हें ही होती है। लेकिन लांबट ने जानबूझकर कुछ कर्मचारियों को परेशान करने के लिए ये तबादले किए हैं।

पहचान नहीं होने से संदिग्ध माना जाता है 

एक और गंभीर तथ्य यह है कि जंगल में दिन-रात काम करने वाले इन मज़दूरों के पास अभी तक आधिकारिक पहचान पत्र नहीं हैं। उचिबागले ने बताया कि इसीलिए पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ पहचान पत्र न होने के कारण वन मज़दूरों को संदिग्ध मानकर पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लेती हैं। उन्होंने कहा कि इससे निर्दोष मज़दूरों को अनावश्यक कष्ट सहना पड़ता है।

संगठन ने यह भी शिकायत की कि वन मज़दूरों की सेवा वरिष्ठता सूचियाँ तो तैयार हो गई हैं, लेकिन उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया है। कई मज़दूर वर्षों से जंगल में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो कोई स्थायीकरण मिला है और न ही सेवा लाभ।

माँगें न मानी गईं तो तीव्र आंदोलन

संगठन के नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन वन मज़दूरों की इन माँगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं देता है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। कुल मिलाकर, साकोली स्थित टाइगर प्रोजेक्ट कार्यालय के बाहर चल रहा यह आंदोलन उन वन मज़दूरों का विरोध प्रदर्शन है जो अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल में काम करते हैं। अधिकारों की आवाज़ माने जाने वाले वन मज़दूरों ने अब वर्षों की उपेक्षा, असुरक्षा और अन्याय के ख़िलाफ़ संघर्ष का रास्ता अपना लिया है।