नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल के आरएसएस कार्यक्रम में जाने पर कांग्रेस का भारी बवाल, सर्विस रूल्स के उल्लंघन का लगाया आरोप!
नागपुर: नागपुर के नवनियुक्त पुलिस आयुक्त (CP) विश्वास नांगरे पाटिल के एक हालिया बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में शामिल होकर विश्वास नांगरे पाटिल ने संघ और डॉ. हेडगेवार की जमकर तारीफ की थी। अब इस मामले को लेकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कांग्रेस ने सीधे सूबे के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निशाने पर लेते हुए प्रशासन की 'राजनीतिक तटस्थता' पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस ने पूछा है, "क्या विश्वास नांगरे पाटिल ने संविधान से ऊपर संघ को माना है? वह उस मंच पर एक संवैधानिक अधिकारी के रूप में बोल रहे थे या किसी विशिष्ट विचारधारा के प्रतिनिधि के रूप में?" इसके साथ ही कांग्रेस ने 'ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968' का हवाला देते हुए सरकार के सामने 6 तीखे सवाल दागे हैं:
कांग्रेस के सरकार से वो 6 सवाल, जिन्होंने बढ़ा दी सियासी तपिश:
1. क्या सरकार से पूर्व अनुमति ली गई थी? (Rule 13(2)(f)(iii))
नियम के मुताबिक, किसी भी आईपीएस अधिकारी को सार्वजनिक या निजी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। कांग्रेस ने पूछा कि क्या गृह विभाग या राज्य सरकार से इसके लिए परमिशन ली गई थी? अगर हां, तो सरकार उस अनुमति पत्र को सार्वजनिक करे, और अगर नहीं, तो नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?
2. क्या यह आचरण पद की गरिमा के अनुकूल है? (Rule 3(1))
नियम कहता है कि अधिकारी ऐसा कोई काम न करे जो उसके पद को शोभा न दे। कांग्रेस का सवाल है कि पुलिस कानून की रक्षक होती है, किसी विचारधारा की प्रचारक नहीं। तो फिर एक विशिष्ट वैचारिक संगठन के मंच से उसका उदात्तीकरण करना एक आईपीएस को कैसे शोभा देता है?
3. राजनीतिक तटस्थता या वैचारिक निष्ठा? (Rule 3(1A)(ii))
प्रशासनिक सेवाओं की आत्मा 'पॉलिटिकल न्यूट्रैलिटी' (राजनीतिक तटस्थता) है। कांग्रेस ने पूछा कि संघ का गुणगान करना तटस्थता है या किसी खास विचारधारा के प्रति निष्ठा? कल को अगर कोई दूसरा अधिकारी किसी अन्य धार्मिक या राजनीतिक मंच पर जाकर ऐसा ही करेगा, तो जनता का सिस्टम पर भरोसा कैसे रहेगा?
4. संविधान सर्वोच्च या संघ की विचारधारा? (Rule 3(2B)(ii))
हर अधिकारी संविधान के प्रति जवाबदेह है। कांग्रेस का सवाल है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किसी खास वैचारिक संगठन का सार्वजनिक गौरवगान करना संवैधानिक तटस्थता के दायरे में कैसे आ सकता है?
5. क्या फैसलों पर प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है? (Rule 3(2B)(vi))
यह नियम अधिकारियों को किसी भी संगठन या व्यक्ति के प्रभाव में आने से रोकता है जिससे उनके कर्तव्य प्रभावित हों। कांग्रेस ने शंका जताई है कि जब पुलिस कमिश्नर खुद संघ के मंच पर गौरवोद्गार निकाल रहे हैं, तो भविष्य में उनके फैसलों पर उस विचारधारा का असर नहीं पड़ेगा, इसकी गारंटी कौन देगा?
6. संगठन से संबंध (Association) का गंभीर आरोप (Rule 5(1))
सेवा नियमों के अनुसार, कोई भी ऑन-ड्यूटी अधिकारी राजनीति में भाग लेने वाले किसी भी संगठन से संबद्ध (Associated) नहीं हो सकता। कांग्रेस का सबसे गंभीर सवाल यही है कि क्या मंच पर जाकर सार्वजनिक रूप से संघ की तारीफ करना 'Association' के दायरे में नहीं आता?
वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अलग नियम क्यों?
कांग्रेस ने सरकार की चुप्पी पर निशाना साधते हुए कहा, "अगर कोई सामान्य पुलिसकर्मी या सिपाही किसी राजनीतिक स्टैंड को लेता है तो उस पर तुरंत निलंबन और कार्रवाई की गाज गिरती है, तो फिर क्या वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के लिए नियम अलग हैं? आज यह लड़ाई सिर्फ विश्वास नांगरे पाटिल के खिलाफ नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता, खाकी की प्रतिष्ठा और संविधान की सर्वोच्चता की है।" कांग्रेस ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
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