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Nagpur

"जो BJP के साथ जाता है, वो डूबता है", विजय वडेट्टीवार का अब्दुल सत्तार को महायुति छोड़ने का मशविरा; कृषि नीति और कर्जमाफ़ी पर भी घेरा


नागपुर: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। वडेट्टीवार ने शिवसेना शिंदे गुट के नेता अब्दुल सत्तार को महायुति से बाहर निकलने की दो टूक सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों, किसानों की कर्जमाफ़ी और गडचिरोली में शराबबंदी जैसे कई गंभीर मुद्दों पर राज्य और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है।

सरकार के भीतर चल रही खींचतान और फंड न मिलने की खबरों पर चुटकी लेते हुए विजय वडेट्टीवार ने कहा कि अगर अब्दुल सत्तार को स्थानीय स्तर पर फंड नहीं मिल रहा है और उनकी कोंडी हो रही है, तो उन्हें तुरंत महायुति से बाहर आ जाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जो भी बीजेपी के साथ जाता है, बीजेपी उसे डुबोने का काम करती है। वडेट्टीवार के अनुसार इस सरकार में सत्ता की कमान सिर्फ एक ही पार्टी के हाथ में है, जिससे बाकी सहयोगी दलों को भारी परेशानी हो रही है और वे अपना दर्द बयां कर रहे हैं। अब अंतिम फैसला अब्दुल सत्तार को ही करना है कि वे क्या कदम उठाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश और कृषि नीतियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि पीएम मोदी ने जो विभिन्न देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय कृषि समझौते किए हैं, वे भारतीय किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। जब तक इन समझौतों की समीक्षा करके इन्हें रद्द नहीं किया जाता, तब तक देश के किसानों की हालत नहीं सुधर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि फिलहाल प्याज उत्पादक किसानों की सरेआम लूट हो रही है। व्यापारियों द्वारा कम दामों पर प्याज खरीदकर उसकी जमाखोरी की जा रही है और सरकार इस पर मूकदर्शक बनी बैठी है।

महायुति सरकार द्वारा की गई किसानों की कर्जमाफ़ी को वडेट्टीवार ने पूरी तरह एक दिखावा करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ़ करने की बात कही है, लेकिन इसके ऊपर की बकाया राशि भरने के लिए किसानों के पास पैसे ही नहीं हैं। पुराना कर्ज पूरी तरह साफ न होने के कारण बैंकों से उन्हें नया लोन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि खरीफ का सीजन सिर पर है और अगर सरकार अब फैसला ले भी लेती है, तो किसानों के खातों में पैसे पहुंचने में काफी समय लगेगा। यदि खरीफ सीजन बीत जाने के बाद पैसा मिला, तो किसान फसल ही नहीं लगा पाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रोत्साहन निधि का फैसला उनकी सरकार का था, जिसे यह सरकार चार साल बाद लागू कर रही है, जिससे इनकी किसान विरोधी मानसिकता साफ झलकती है।

महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में शराबबंदी हटाने की मांग का समर्थन करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि उन्होंने खुद चंद्रपुर जिले से शराबबंदी हटवाई थी क्योंकि दुनिया और देश के सभी हिस्सों में शराब मिलती है। शराबबंदी लागू करने से कोई भी समाज व्यसनमुक्त नहीं होता है। उन्होंने पुणे का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां नकली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई, लेकिन उस आंकड़े को दबाया जा रहा है। गडचिरोली में अब औद्योगिक क्षेत्र बढ़ रहा है और वहां आदिवासियों को महुआ के फूलों से पारंपरिक अर्क निकालने का अधिकार है, जबकि दूसरों के लिए पाबंदी है। इसलिए वे धर्मरावबाबा आत्राम की गडचिरोली से शराबबंदी हटाने की मांग का पूरी तरह समर्थन करते हैं।