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Bhandara

Bhandara: गुस्साए किसानों ने नगर परिषद दफ्तर पर बोला धावा, मुख्य अधिकारी के केबिन के बाहर फेंके सैकड़ों किलो बैंगन


भंडारा: जिले में कृषि दिवस से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को नगर परिषद प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ किसानों का भारी आक्रोश देखने को मिला। बीटीपी (BTP) सब्जी मंडी में पांच बड़े व्यापारियों की दुकानें सील किए जाने से नाराज दर्जनों किसानों ने सब्जियां बेचने का कोई दूसरा जरिया न बचने पर नगर परिषद कार्यालय पर धावा बोल दिया। गुस्से से लाल किसानों ने मुख्य अधिकारी (Chief Officer) के केबिन के ठीक बाहर सैकड़ों किलो बैंगन और अन्य हरी सब्जियां फेंककर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अचानक हुए हंगामे और दफ्तर के बाहर सब्जियों के ढेर लगने से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई, जिसे बाद में सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह संभाला।

इस पूरे विवाद की जड़ नगर परिषद द्वारा दो दिन पहले बंडू बारापात्रे, अतुल मानकर, मंगेश राउत, किरण भेड़े और दीपक पराटे जैसे प्रमुख व्यापारियों की दुकानें मंडी टैक्स न भरने का आरोप लगाकर सील करना है। दूसरी तरफ, पीड़ित व्यापारियों का आरोप है कि नगर पालिका की यह कार्रवाई पूरी तरह गलत और बदले की भावना से की गई है, क्योंकि इस टैक्स मामले पर पहले से ही कोर्ट में विवाद चल रहा था।

व्यापारियों का कहना है कि नियमों के मुताबिक टैक्स दुकान के एरिया (क्षेत्रफल) के हिसाब से लगना चाहिए, लेकिन प्रशासन जबरन हर बोरे पर पांच रुपये वसूल रहा है। व्यापारियों की दुकानें अचानक बंद होने से बेचने का कोई दूसरा सिस्टम उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण हजारों किलो सब्जियां मंडी में ही सड़ने लगी हैं और जिले भर के किसान अपनी गाढ़ी कमाई बर्बाद होते देख दाने-दाने को तरस रहे हैं।

दफ्तर परिसर में हंगामा शांत होने के बाद पुलिस की मौजूदगी में मुख्य अधिकारी और पीड़ित किसानों के बीच एक आपात बैठक हुई, जिसमें किसानों ने अपनी मांगें बेहद कड़े शब्दों में रखीं। आंदोलन में शामिल किसान पवन कडव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे सालों से बंडू बारापात्रे की दुकान पर अपनी सब्जियां बेचते आ रहे हैं, लेकिन दो दिन से तालाबंदी होने के कारण उनका सारा माल खराब हो रहा है और इतनी बड़ी मात्रा में सब्जियां छोटे फुटकर दुकानदारों को बेचना नामुमकिन है।

किसानों ने प्रशासन को दो टूक अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि या तो सील की गई दुकानों को तुरंत खोला जाए ताकि व्यापार दोबारा शुरू हो सके, या फिर नगर परिषद खुद आगे आकर किसानों की फंसी हुई पूरी सब्जी खरीदे और उसका नकद भुगतान करे। कृषि दिवस के मौके पर अन्नदाता का इस तरह सड़कों पर सब्जियां फेंकने को मजबूर होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।